सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
जिले के गैरतगंज नगर के नंदनी नगर क्षेत्र में अष्टसखी महिला मंडल द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र के प्रसंग ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति से कथा स्थल भक्तिमय हो गया।
कथा वाचक पंडित श्याममूर्ति दास महाराज ने सुदामा चरित्र और सुखदेव विदाई का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी की कोई जगह नहीं होती।

उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा के मिलाप का हृदयस्पर्शी वृत्तांत सुनाते हुए बताया कि सुदामा चरित्र हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, धैर्य नहीं खोना चाहिए। भगवान कृष्ण ने अपने मित्र सुदामा की विपन्नता देख उन्हें अपने सिंहासन पर बैठाया और अश्रुपूर्ण नेत्रों से उनका स्वागत किया। सुदामा ने अभावों में रहने के बावजूद अपने मित्र से कुछ नहीं मांगा। यही निस्वार्थ समर्पण ही वास्तविक मित्रता है। कथा के दौरान परीक्षित मोक्ष और भगवान सुखदेव की विदाई का प्रसंग भी सुनाया गया। बीच-बीच में प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमने और नृत्य करने लगे। महाराज जी ने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से आत्मा को परम सुख और शांति की प्राप्ति होती है। सात दिनों तक चली इस ज्ञान गंगा में अष्टसखी महिला मंडल की सदस्य सहित क्षेत्र के सैकड़ों महिला-पुरुष श्रोताओं ने धर्म लाभ लिया।