– शारडा एनर्जी फेक्ट्री में हुए दर्दनाक हादसे में मृत श्रमिक की दर्दनाक दास्तान
सुरेंद्र जैन धरसीवा
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सरगंवा गांव से एक गरीब बुजुर्ग बीमार मातापिता ओर विकलांग भाई का एक मात्र सहारा कृष्णा माल मेहनत मजदूरी कर कमाने निकला और पहुंच गया राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा जहां शारडा एनर्जी फेक्ट्री में ठेकेदार के अधीन वह काम करने लगा और अपने बुजुर्ग मातापिता व विकलांग भाई को पैसे भेजने लगा लेकिन उसे क्या मालूम था कि ये फेक्ट्री उसके जीवन का काल बन जाएगी शनिवार को फेक्ट्री में हुए दर्दनाक हादसे में मृत कृष्णा माल की ये दर्दभरी दास्तान है ओर न जाने ऐसे कितने की कृष्णा माल की तरह अब तक औद्योगिक इकाइयों में अपनी जान गंवा चुके है लेकिन आज तक जिम्मेदारों ने ऐसा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया उद्योगों में हादसे थमें।
कृष्णा माल पिता केशव चंद माल की दर्दनाक मौत शनिवार शाम साढ़े चार बजे शारडा एनर्जी फेक्ट्री में काम के दौरान हादसा होने से हुई फेक्ट्री में हुए हादसे को लेकर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और जिम्मेदारों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठने लगे हैं

बारह लाख के चेक के साथ गांव भेजा शव
मेकाहारा में जहां मृतक का पोस्ट मार्डम हुआ वहां इस प्रतिनिधि ने जाकर मृतक के परिवार मातापिता विकलांग भाई से मिलने उन्हें खोजा लेकिन पता चला कि मृतक के मातापिता विकलांग भाई नहीं आए हैं कुछ जा प्रतिनिधि समझौता कराने पहुंचे हुए थे एक महिला एक बच्चे के साथ फूट फुटकर रो रही थी जो अपना नाम सावित्री सोनी बता रही थी उनका कहना था कि मृतक कृष्णा माल उसका दूसरा पति है वह डेढ़ साल से उसके साथ रह रही थी ठेकेदार के अधीन उनके पति फेक्ट्री में काम करते थे शनिवार रात आठ बजे ठेकेदार ने बताया कि तुम्हारे पति की फेक्ट्री में मौत हो गई

समझौता के पेपर में फेक्ट्री का नाम तक नहीं
एक युवक को मृतक का रिश्तेदार बताते हुए बारह लाख का चेक मृतक के पिता के नाम से दिया गया एक लाख रुपए नगद दिए गए एंबुलेंस की गई मौके पर शारडा एनर्जी फेक्ट्री के एक कर्मचारी ओर लेबर ठेकेदार मौजूद है लेकिन समझौते के कागज पर कहीं भी फेक्ट्री के नाम का उल्लेख नहीं किया गया न ही फेक्ट्री में हुए इस बड़े हादसे का कहीं कोई उल्लेख है हालांकि समझौता कराने वाले धरसीवां के जनप्रतिनिधियों के नाम जरूर लिखे हैं।

क्या बारह लाख में कट जाएगी मातापिता ओर विकलांग की जिंदगी
मृतक के पिता के नाम एक बारह लाख के चेक के साथ कृष्णा माल का शव एंबुलेंस से उसके गांव के लिए रवाना कर दिया गया लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जो कृष्णा गांव से जीवित आया था सिर्फ इसलिए कि वह विकलांग भाई ओर बुजुर्ग मातापिता को मजदूरी कर पैसे भेजता रहेगा ताकि उनका जीवन निर्वाह हो सके अब वह जीवित नहीं रहा बल्कि उसका शव गांव वापस भेजा गया है साथ में पिता के नाम बारह लाख का चेक भेजा गया है तो क्या इन बारह लाख में मृतक के मातापिता ओर विकलांग भाई का पूरा जीवन निर्वाह हो जाएगा
हेल्थ सेफ्टी विभाग कहां है
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग का काम होता है उद्योगों में सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन हो लेकिन इस घटना ने सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े कर दिए है क्या हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग ने अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया