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रायसेन के ऐतिहासिक किले के इतिहास को पहली बार किसी मंच पर बेहद संवेदनशील तरीके से “पारस पत्थर” नाटक का मंचन

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रायसेन पारस पत्थर की अनकही कहानी

-विजय सिंह राठौर रायसेन 

रायसेन के ऐतिहासिक किले के इतिहास को पहली बार किसी मंच पर बेहद संवेदनशील तरीके से “पारस पत्थर” नाटक का मंचन कर दिखाया गया। जिसमे रायसेन के राजा रहे पूरनमल ने शेरशाह सूरी के आक्रमण के दौरान 4 महीने तक चले युद्ध मे कैसे अपना शौर्य दिखाकर किले को अजेय रखा ओर अन्त में शेरशाह सुरी के धोखे से संधि तोड़ने के बाद रानी रत्नावली का स्वयं ही अपनी तलवार से गला काट कर राज्य के स्वाभिमान की रक्षा कर अंत तक युद्ध लड़कर अपना बलिदान दे दिया। इस इतिहास को अब तक लोगो ने किताबो में पढ़ा था लेकिन पहली बार किसी निजी स्कूल के करीब 400 स्कूली बच्चों ने बेहद ही रचनात्मक ढंग से मंच पर इसका सजीव चित्रण कर दर्शकों का मन मोह लिया। नगर के सेंट फ्रांसिस कान्वेंट स्कूल ने अपने स्थापना दिवस का 50 वां गोल्डन जुबली उत्सव मनाया। इस मोके पर लगभग स्कूल के करीब 1200 बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमो में हिस्सा लिया ।

रायसेन जिला मुख्यालय के सेंट फ्रांसिस कान्वेंट स्कूल ने इस बार अपने स्थापना का 50 वॉ गोल्डन जुबली दिवस मनाया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में नगर पालिका की अध्यक्ष श्रीमती सविता जमुना सेन जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंत मीणा सहित कलेक्टर रायसेन अरुण विश्वकर्मा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुवात गणेश वंदना से हुई और मां दुर्गा की इस्तुति का आयोजन हुआ। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमो ने परिजनों और दर्शकों का मन मोह लिया। ऐतिहासिक किवदंती अनुसार रायसेन किले पर पारस पत्थर होने को लेकर बनाया गया “पारस पत्थर” ने गजब तालियां बटोरी तो वही हर तरफ इस नाटक की प्रशंसा हो रही है।आपको बता दें कि रायसेन के ऐतिहासिक किले पर पारस पत्थर होने की बात कही जाती है इसी को लेकर सेंट फ्रांसिस कान्वेंट स्कूल ने अपने गोल्डन जुबली कार्यक्रम में पारस पत्थर की थीम बनाकर उसको प्रस्तुत किया जिसकी तारीफ हजारों की संख्या में पहुंचे परिजनों ने की।वहीं स्कूल की प्रिंसिपल हेलन का कहना था कि लगभग 1200 स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिया है ।

मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई सविता  सेन ने कहा कि पारस पत्थर कार्यक्रम को देखकर रायसेन के ऐतिहासिक के लिए के बारे में जानकारी मिली है जो बाकी में वाकई में प्रशंसनीय है और मै माननीय मुख्यमंत्री से मिलकर इस नाटक को आगामी 26 जनवरी के कार्यक्रम में ओर रायसेन के गौरव दिवस में शामिल करने का प्रस्ताव रखूंगी ताकि देश दुनिया को भी हमारे इस किले और उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी मिल सके।इस कार्यक्रम में लगभग 5 हजार परिजन अपने बच्चों के कार्यक्रम को देखने पहुंचे।

 

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