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नगर में जोरशोर से चलने वाली सौलर पेनल एवं मल जल योजना पडी ठंडी 

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देवेंद्र तिवारी सांची रायसेन 

सांची को विकास का सपना दिखाने वाली करोडों की लागत से सौर पेनल एवं जलमल योजना का अब कहीँ कोई अतापता दिखाई नहीं देता नागरिकों को विकास का सपना टूटता दिखाई देने लगा है।
जानकारी के अनुसार इस नगर की प्रसिद्धि को देखते हुए इस स्थल पर बडे बडे विकास के दावे एवं नगर को विकास शील बनाने की कवायद थमी सी दिखाई देने लगी है ।इस नगर को रहवासियों को घर घर जल पहुचाने एवं चौबीस घंटे जल प्रदाय करने तथा नगर के हर घर तक सीवरलाइन पहुंचा की तर्ज पर शासन ने करोड़ों रुपये की राशि आवंटित करते हुए योजना अमल मे लाई गई तथा इन योजना को धरातल पर उतारने जोरशोर से प्रचारित करते हुए नगर वासियों को बडे बडे सपने दिखाये गए तब लोगो को लगने लगा कि नगर वासियों की अब पेयजल समस्या पूरी तरह खत्म हो सकेगी हालांकि अनेक बार निर्माण कर्ताओं द्वारा घर घर नाप तौल कराई गई तब लोगों को विश्वास पक्का दिखाई दिया परन्तु यह योजना लंबा अरसा गुजरने के बाद भी न तो सीवर लाइन से जोडा जा सका न ही चौबीस घंटे पेयजल आपूर्ति हेतु ही योजना लोगो के घर तक पहुंच सकी ।तथा आज भी लोग पेयजल आपूर्ति के लिए नगर परिषद प्रशासन पर ही निर्भर बने हुए हैं तथा पेयजल आपूर्ति का वहीं ढर्रा हर दिन चौबीस घंटे में मात्र 45 मिनट ही आपूर्ति व्यवस्था हो सकी तब जलमल योजना जिसके क्रियान्वयन के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए आवंटित किए वह लोगों की जानकारी से दूर हो चुकी।

हालांकि इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश नगरीय सेवाओं के उन्नयन कार्यक्रम के तहत लागू हुई थी तथा इस योजना इस योजना के क्रियान्वयन में ऐशियन डेवलपमेंट बैंक से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई थी।इसके धरातल पर उतारने मप्र अर्बन डेवलपमेंट कं,लि ,को जिम्मेदारी सौंपी गयी परन्तु कुछ समय तक तो खूब जोरशोर चला तथा लोगों को विश्वास भी हो चला कि अब नगर वासियों को चौबीस घंटे पेयजलापूर्ति का लाभ मिल सकेगा ।परंतु यह विश्वास तब टूट गया जब कुछ समय बाद ही जलमल के मात्र बोर्ड ही दिखाई दिये तथा योजना लुप्त होती दिखाई देने लगी तथा धरातल पर पहुचने के पहले ही दम टूटता दिखाई देने लगा ।इससे इस योजना पर करोड़ों रुपए खर्च होने से स्थिति संदेह के घेरे में पहुंच गई ।यही हाल इस ऐतिहासिक स्थल को देशभर की पहली सोलर सिटी का खिताब तो करोड़ों रुपये खर्च कर मिल गया तथा नगर भर मे जिम्मेदारो ने पोल लगाकर सौर प्लेट लगाकर जगमगा तो दिया परन्तु इस पलटकर देखने की जहमत नहीं उठा सके जिससे पोल गायब होने के साथ ही आडे हो गए एवं उनपर लगी प्लेट भी तहसनहस हो चुकी तथा सौर ऊर्जा की चर्चा भी लोग भूल बैठे इतना ही नहीं बताया जाता हैं जिन लोगों ने सौर ऊर्जा के लाखों रुपए खर्च कर कनेक्शन लिये वह भी कनेक्शन लेकर पछतावा भुगत रहे है तथा नगर पूरी तरह सौर ऊर्जा मुक्त सा दिखाई पडने लगा तब चर्चा भी तेज हो गई कि जोर शोर से नगर को सौलर पेनल प्लांट से बिजली के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल होगी परन्तु इसके विपरीत ही इसका असर दिखाई देने लगा है तब इस नगर में सौलर सिटी के नाम पर करोड़ों भेट चढ गए नतीजा अंधियारा ही हाथ लगा तब लोगों की जुबान पर सरकार की करोड़ों रुपए की राशि खर्च होने पर संदेह खडे होने लगे है साथ ही सवाल भी खडे हो रहे है ।तब लोग जलमल एवं सौलर सिटी के नाम पर सरकार की करोड़ों की राशि कागजों में खर्च होने पर सवाल उठना शुरू हो गए है ।

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