भोपाल।जहाँ एक ओर प्रदेश में शिक्षक दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया,विभिन्न सामाजिक संगठनों और सरकार द्वारा शिक्षकों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए गए और वेतन वृद्धि की घोषणाएँ हुईं,वहीं दूसरी ओर एक दुर्भाग्यपूर्ण पहलू सामने आया।शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत लगभग पाँच हजार अतिथि विद्वानों को इस दिन वेतन कटौती की सजा भुगतनी पड़ेगी।
अतिथि विद्वानों को न तो शासन ने याद किया और न प्रशासन ने सम्मानित करने की जहमत उठाई।जिस दिन अन्य शिक्षकों का सम्मान हुआ,उसी दिन अतिथि विद्वानों का अपमान हुआ।
अतिथि विद्वान शोषण सहने को विवश
प्रदेश में धूमधाम से मना शिक्षक दिवस
अतिथि विद्वान महासंघ द्वारा वर्चुअल माध्यम से “शिक्षक सम्मान समारोह” आयोजित किया गया,जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में अतिथि विद्वान शामिल हुए।इस अवसर पर अतिथि विद्वानों ने ही अपने अतिथि विद्वान शिक्षकों को सम्मानित कर सच्चे शिक्षक दिवस की मिसाल पेश की।गौरतलब है कि अतिथि विद्वानों के पढ़ाये हुए छात्र आज बड़ी संख्या में अतिथि विद्वान और सहायक प्राध्यापक के साथ देश प्रदेश के कई उच्च पदों पर हैं।डॉ के पी मिश्रा,डॉ धर्म शर्मा,डॉ रवी श्रीवास्तव आदि अतिथि विद्वान उपस्थित रहे ज़ो 60 वर्ष की उम्र पार कर रहे हैं।बुढ़ापे में रिटायमेंट के बाद शासन की ओर से कोई आर्थिक लाभ नही।
महासंघ के पदाधिकारियों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की—
डॉ.नीमा सिंह,महिला मोर्चा अध्यक्ष महासंघ
“शिक्षक दिवस का दिन अतिथि विद्वानों के लिए पीड़ा का दिन बन गया।हमें सम्मान नहीं मिला,उल्टे हमारे मानदेय में कटौती कर अपमानित किया गया।बहुत से शिक्षक वर्गों के वेतन वृद्धि की घोषणाएं सरकार ने की लेकिन तीन दशकों से अत्यल्प मानदेय में काम कर रहे अतिथि विद्वानों की सुध नही ली।”
– डॉ. अविनाश मिश्र,उपाध्यक्ष
“प्रदेश में धूमधाम से शिक्षक दिवस मनाना और दूसरी ओर हजारों अतिथि विद्वानों को अनदेखा करना दोहरे मापदंड हैं।अधिकांश अतिथिविद्वान उम्रदराज हो गए हैं,पर उनके बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा नही है।शिक्षक दिवस के दिन अतिथि विद्वानों को मान और मानदेय दोनों से वंचित कर दिया गया।”
– डॉ जेपीएस चौहान,महासचिव
“मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मंच से कहा था कि नई शिक्षा नीति अतिथि विद्वानों के योगदान से सफलता पूर्वक संचालित हो रही है।अतिथि विद्वान वर्षों से प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के कर्णधार हैं।मुख्यमंत्री जी की संवेदना के बावजूद अतिथि विद्वानों की सेवा न तो सुरक्षित हुई और न ही उनके अधिकारों की रक्षा।”
– डॉ.आशीष पाण्डेय,मीडिया प्रभारी
“हमारे हजारों विद्यार्थी आज समाज में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं,जो कभी अतिथि विद्वानों के शिष्य रहे।फिर भी सरकार हमें उपेक्षित कर रही है।सितम्बर 2023 में अतिथि विद्वान महापंचायत की घोषणाएं सितम्बर 2025 तक लागू नही हो सकीं,यह बहुत निराशाजनक है, स्थाइत्व और फिक्स मासिक वेतन बस हमारी मांग है फालेन आउट शब्द क़ो विलोपित किया जाए”