-अधिक भुगतान को लेकर सीएमओ ने उपयंत्री को जारी किया नोटिस
देवेन्द्र तिवारी सांची,रायसेन
नगर परिषद द्वारा निर्माणाधीन विकास पर उठने लगे सवाल ।वार्ड पार्षद ने जहां नाले निर्माण पर सवाल खड़े कर दिये तो दूसरी ओर सीएमओ ने अपनी जांच उपरांत उपयंत्री को नोटिस थमाते हुए अधिक भुगतान की अनुशंसा पर नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांग डाला ।इससे नाले निर्माण मे चल रही गडबडी की चर्चा खुलने लगी है ।
जानकारी के अनुसार संबोधि होटल से विदिशा रोड पर स्थित पुलिया तक नगर के पानी निकासी हेतु लंबे अरसे से प्रस्तावित लगभग दो करोड़ अठ्हत्तर लाख रुपये लागत से निर्माण कार्य चल रहा था कि इस नाले निर्माण की जद मे अतिक्रमण आने से विवाद के घेरे में आ गया तथा संबोधि होटल से शासकीय उद्यान तक निर्मित नाला निर्माण सवालों के घेरे में आ चुका इस नाले निर्माण के कारण वार्ड पार्षद विवेक तिवारी द्वारा भी आपत्ति दर्ज कराई गई तथा सीएमओ को आवेदन देकर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा गया कि इस नाले निर्माण में नियमों को दरकिनार कर मिली भगत से शासन की राशि को चूना लगाया जा रहा है यह नाला निर्माण एसडीआरएफ योजना अंतर्गत निर्माणाधीन है इस नाले निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग से 58 फिट छोड़ कर निर्माण किया जाना था तथा इसकी जद मे आने वाले बिजली पोल हटाये बिना निर्माण किया जा रहा है जबकि निर्माण को बीच बीच मे छोड़ कर किया जा रहा है तथा यह निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग के नियमों को दरकिनार कर मिलीभगत से जारी है इसके साथ ही तकनीकी स्वीकृति को भी दरकिनार कर दिया गया है एवं निर्माण के नाम पर बिना निर्माण हुए भुगतान किया जा रहा है ।इस मामले में पार्षद श्री तिवारी ने बताया कि हमने राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों से भी चर्चा की उनका कहना है कि हमारे विभाग अंतर्गत 58 फिट छोड कर नाला निर्माण होना है जब भी हमारे रोड का चौडीकरण होगा हमारी सीमा में आने वाले निर्माण को हटा दिया जायेगा इस स्थिति में शासन की करोडों रुपये की राशि को पलीता लग जायेगा ।इस मामले में पार्षद की आपत्ति पर सीएमओ रामलाल कुशवाहा ने जांच करवाई जिसमें पाया गया कि उपयंत्री द्वारा प्रथम भुगतान के रूप में ठेकेदार को 850 मीटर का भुगतान 5201263 किया गया ।इसके पश्चात द्वितीय भुगतान के रूप में माप पुस्तिका मे 1650 मीटर भुगतान करने हेतु प्रस्तुत किया गया जब निर्माणाधीन स्थल पर निर्माण की वास्तविक माप कराई गई तो वह संबोधि होटल से शा उद्यान तथा लंबाई 1250 मीटर पाई गई इस स्थिति में ठेकेदार की मिलीभगत से 400 मीटर का भुगतान फर्जी तरीके से प्रस्तुत किया गया इस बिना निर्माण के फर्जी भुगतान हेतु देयक पर रोक लगाते हुए उपयंत्री को सीएमओ द्वारा नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है तथा संतुष्ट न होने पर वरिष्ठ अधिकारियों से कार्यवाही करवाने की चेतावनी दी गई है इस प्रकार कहीं न कहीं पार्षद के आरोप सच साबित होते दिखाई देने लगे हैं ।हालांकि नगर में जगह जगह विकास के नाम पर शासन की करोड़ों रुपये की राशि लगती रही हैं तथा जबजब विकास के नाम पर निर्माण हमेशा से विवादास्पद बनते रहे है तब आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह विकासो के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होने की नगरी में खूब चर्चित हुए हैं ।