अनिल सक्सेना रायसेन
रायसेन शहर पिछले पांच दिनों से अंधेरे के आगोश में हे। बिजली बिभाग ने विधुत बकाया राशि जमा न करने पर शहर की स्ट्रीट लाइट काट दी हे। स्ट्रीट लाइट के खम्बे अब झंडे पताका लगाने के काम आ रहे हे। बेशर्म जनप्रतिनिधि इस सबसे बेखबर माथुरा बृंदावन् की यात्रा के मजे ले रहे हे।
उल्लेखनीय हे कि रायसेन शहर का बिजली बिल करीब डेढ़ करोड़ का बकाया हे। इसके अलाबा 2 करोड़ की राशि हलाली पेयजल योजना के बिजली बिल की हे। सिर्फ मार्च आते आते नगरपालिका दिवालिया हो जाती हे उसके पास न तो बिजली बिल जमा करने पैसे होते हे न वेतन बाटने राशि। पांच दिन से सारा शहर अंधेरे के आकोश में हे। आम जनता परेशान हे। अपराधिक गतिविधियाँ इन अंधेरों में बढ़ने की संभावना हे। पुलिस भी चिंतित हे ।लेकिन नगरपालिका में बने बैठे सरकार को इसकी चिंता नही हे।उसके पास सिर्फ एक रोना हे बजट नही हे।
पार्षदों की माथुरा बृंदावन यात्रा चर्चा मे
हाल ही में नगरपालिका अध्यक्ष के सौजन्य से शहर के पार्षदों को कराई गई माथुरा बृंदावन यात्रा चर्चा में हे। पार्षदों को खुश करने आयोजित इस यात्रा के लोग चाय पान ठेलो पर चाटकारे लेकर मजे ले रहे हे।अब इस यात्रा के प्रयोजन पर अटकले लग रही हे। अंदर खाने की बात यह हे कि नगरपालिका का वर्ष 2025-26 का बजट पारित होना हे। बजट मनमर्जी से पारित हो जाए इसका कोई विरोध न हो इसके लिए पार्षदों और उनके पतियों को खुश करने यात्रा कराई गई। लेकिन चर्चा तो यह भी हे कि इस यात्रा के लिए बजट किसने और कैसे मुहैया कराया।बताया जा रहा हे कि नगरपालिका से रिटायर हुए स्टोर कीपर का दखल इन दिनों ज्यादा बढ़ गया हे। रिटायरमेंट के बाद भी यह व्यक्ति नगरपालिका में सारे मैनेजमेंट के साथ सप्लाई का काम कर रहा हे।करे भी क्यो न दूध देने बाली गाय जो हे।
विकास तो हुआ नही खोद डाली शहर की सडके
रायसेन शहर के कई बार्ड में विकास के नाम पर सिर्फ नारियल फोड़े गये।जिन क्षेत्रो से ज्यादा टेक्स मिलता हे वहां विकास ही नही हुआ।यहां के पार्षद भी सिर्फ खाना पूर्ति में लगे रहते हे। अपने वार्डो का विकास के लिए इसलिए आबाज नही उठा पाते क्योकि चुनाव के दौरान मुखिया चुनने एक मोटी रकम जो ले रखी हे। जगह जगह पाईप लाइन डालने से बचे खुचे रोड भी खराब हो गये हे।घटिया पाईप लाइन डालने के भी स्वर सुनाई देते हे लेकिन विरोध कोई नही करता।