रायसेन – रायसेन जिला बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य हरीश मिश्र ने कहा कि डिजिटल और वर्चुअल माध्यमों के जरिए सरकार ने सांची से बरेली और बरेली से मंडीदीप तक सेवाएं पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। ऐसे में जिलों का पुनर्गठन कर भौतिक सीमाओं में परिवर्तन करना अनुचित कदम प्रतीत होता है।
वर्चुअल माध्यमों ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बना दिया है। अब लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भौतिक रूप से मुख्यालय तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ती। डिजिटलीकरण ने दूरदराज के क्षेत्रों को भी मुख्यालय से जोड़ दिया है, जिससे भौगोलिक सीमाओं का महत्व काफी हद तक कम हो गया है।
जिलों के पुनर्गठन में भौतिक सीमाओं को बदलने के बजाय, सरकार को डिजिटल बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत करना चाहिए, ताकि विकास और सेवाओं की पहुंच हर नागरिक तक समान रूप से हो सके। भौगोलिक पुनर्गठन से प्रशासनिक लागत में वृद्धि होती है, सामाजिक असंतोष पैदा हो सकता है, और स्थानीय पहचान भी प्रभावित हो सकती है।
इसलिए, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भौतिक सीमाओं के आधार पर रायसेन जिले का पुनर्गठन न केवल अनुचित है, बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी अव्यावहारिक है। सरकार को अपनी नीतियों में इस बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।