सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
आधुनिकीकरण के इस युग मे अपने बच्चो को शिक्षा के साथ साथ धार्मिक संस्कार देना बहुत आवश्यक है। किसी व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के निर्माण के लिए जरूरी है कि वह शिष्टाचार, धार्मिक संस्कारों में पारंगत रहे। यह बात नगर में पर्युषण पर्व के मौके पर चल रहे श्रावक संस्कार शिविर के दौरान मुनि निर्णयसागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कही।

श्री सकल दिगंबर जैन समाज पंचायत के तत्वाधान में पर्युषण पर्व के पावन पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। विशेषतौर पर जैन आचार्य समयसागर महाराज के परम शिष्य मुनि निर्णयसागर महाराज के मंगल चातुर्मास के पावन सानिध्य में पर्युषण पर्व मनाया जा रहा है। इस मौके पर 10 दिवसीय श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन किया गया है। इस मौके पर मुनि निर्णय सागर महाराज ने दक्षलक्षण महापर्व के तृतीय दिवस उत्तम आर्जव धर्म के अपने मंगल प्रवचन में 15 वें श्रावक संस्कार शिविर के शिवरार्थियो को सम्बोधित करते हुए कहा कि दक्ष लक्षण महापर्व में वर्षा हो रही है, यह शुभ संकेत माने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि श्रावक शिविर में शामिल छोटे छोटे बच्चो को शिक्षा के साथ साथ धार्मिक संस्कार मिल रहे हैं। बच्चों का शिविर में शामिल होना कहीं न कहीं उनके माता पिता का बहुत बड़े पुरुषार्थ का परिचायक है। उन्होंने कहा कि मायाचारी नहीं करना ही आर्जव धर्म है। संसार मे मायाचारियो की कमी नही है एक से बढ़कर एक मायाचारी इस संसार मे है। उन्होंने मोबाइल को मायादेवी का खजाना बताते हुए कहा कि मोबाइल ने व्यक्ति को अपने कर्तव्यों से विमुख किया है। इसलिए मोबाइल रूपी मायादेवी से बचकर रहे। एक साहित्यकार ने लिखा है कि स्कूल में गुरुजी पढ़ाते है तो वहां मायाचारी नही करना, झूठ नही बोलना। श्रावक संस्कार शिविर के 10 दिवसीय आयोजन में नगर एवं बाहर से 400 शिवरार्थी शिविर में शामिल हैं। मुख्य कार्यक्रम नगर के टेकापार जैन धर्मशाला में आयोजित किये जा रहे हैं तथा शिवरार्थियो की आवास व्यवस्था एवं रात्रि विश्राम नगर के मातृ श्री गार्डन एवं एचपी गार्डन में की गई है।