ओपन स्कूल से परीक्षा देने आई गीता वापिस अपने गाँव रवाना,सहयोग देने पर समाजसेवी पुरनसिंह लोधी का माना आभार
आभार जताने आई मुड़ियाखेड़ा,लोधीजी को भेट किया तुलसी का पौधा
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता श्री पूरन सिंह लोधी निवासी मुड़ियाखेड़ा (सांची) के द्वारा गीता के लिए भोपाल में स्थित इनके मकान में रहने,भोजन पानी की व्यवस्था की । इस दौरान पूरन सिंह के सहयोग हेतु गीता ने स्वयं मुड़ियाखेडा अपने मार्गदर्शक श्री ज्ञानेंद्र पुरोहित के साथ पहुंचकर उनको आभार प्रदर्शित किया ।मंगलवार को गीता गुड़िया खेड़ा पहुंचकर पूरन सिंह लोधी को पीपल का पौधा भेंट कर धन्यवाद दिया। मुड़ियाखेड़ा से गीता अपने घर औरंगाबाद ट्रेन से जाने हेतु श्री पूरन सिंह एवं ज्ञानेंद्र पुरोहित के साथ भोपाल रवाना हुई ।

कहानी गीता की —–
गलती से सीमा पार गई गीता 15 साल से पाकिस्तान में फंसी रही थी। गीता जब 9 साल की थीं, तब भारत—पाकिस्तान सीमा के पास पाकिस्तान रेंजर्स को मिली थी। इसके बाद गीता ने 15 साल से ज्यादा वक्त पाकिस्तान में गुजारा था ।
विदिशा लोकसभा सीट से सांसद रही श्रीमती सुषमा स्वराजके ही प्रयासो से गीता 26 अक्टूबर 2015 को भारत लौट आई थी सुषमा ने उसे हिंदुस्तान की बेटी कहा था। उसके माता-पिता को खोजने के लिए स्व. सुषमा स्वराज ने एक लाख रुपये इनाम की घोषणा की थी।स्व. सुषमा स्वराज ने गीता के लिए दूल्हा ढूंढने में भी पूरी दिलचस्पी दिखाई और उसका घर बसाने के लिए प्रयास भी किया था।उन्होंने गीता के लिए वह सब कुछ किया जो अपनी बेटी के लिए एक मां करती है। इसके बाद गीता को शिक्षा और कौशल हासिल करने के लिए मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में मूक बधिर बच्चों के एक संस्थान में भेज दिया गया। बाद में गीता का घर ढूढने के लिए गीता को मूक बधिर दिव्यांग जन हेतु कार्य करने वाली संस्था आनंद सर्विस सोसायटी को जुलाई 2020 ने सौंपा गया था ।
आनंद सर्विस सोसायटी के प्रमुख ज्ञानेंद्र पुरोहित के मुताबिक स्व. सुषमा स्वराज ने उनसे कहा था कि गीता के लिए कोई लड़का तलाश करें। सुषमा स्वराज ने गीता को उसके माता-पिता से मिलवाने में सहयोग करने के लिए एक लाख रुपए इनाम की घोषणा भी की थी।
पूर्व विदेश स्व. मंत्री सुषमा स्वराज समेत बड़ी बड़ी हस्तियों ने गीता के घरवालों को ढूंढ़ने की खूब कोशिशें की थी। इसके बावजूद भी घरवालों का कोई पता नहीं लग सका था। इसी दौरान श्रीमती सुषमा स्वराज की मृत्यु से भी गीता बेहद दुखी हुई थी। जिसमें उनका साथ, इंदौर में रहने वाले ज्ञानेंद्र और मोनिका पुरोहित दे रहे थे ज्ञानेंद्र और उनकी टीम गीता की बचपन की यादों के आधार पर महाराष्ट्र से लेकर छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सड़क मार्ग से होते हुए उन स्थानों तक पहुंच रही थी जहां गीता का गांव होने की संभावनाएं थी।
ज्ञानेंद्र ने बताया कि गीता जब नदी के किनारे पहुंचती थी तो वे काफी खुश हो जाती थी उस वक्त उनके चहरे कि खुशी देखने लायक होती थी क्योंकि गीता को लगता है कि उसका घर नदी किनारे है । गीता के घर को ढूंढने के लिए ज्ञानेंद्र पुरोहित और उनकी धर्मपत्नी मोनिका पुरोहित रेलवे पुलिस मुख्यालय भोपाल से हेड कांस्टेबल साधना इंदौर जीआरपी पुलिस ने सहयोग किया।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी दो बार गीता से मिलने पहुंचे उन्होंने भी मिठाई और कपड़े दिए थे । इसके बाद गीता की किसी भी राजनीतिक व्यक्ति ने सुध नहीं ली । गीता की मां मीना पांढरे परभणी में पति सुधाकर की मृत्य के बाद औरंगाबाद शिफ्ट हो गई थी । गीता आर्थिक तंगी से गुजर रही है उसकी मां मिट्टी के मटके बनाकर बेचती है । गीता को अभी तक सरकारी सुविधा नहीं मिली है घर भी टूटा फूटा है जबकि देश में प्रधानमंत्री योजना के अंतर्गत लाखों मकान बनाने के लिए गरीबों को पैसे दिए जा रहे हैं मगर गीता को आज तक यहां सुविधा भी नहीं मिली है।
गीता के मां बाप ढूंढ़ने में ज्ञानेंद्र पुरोहित उनकी पत्नी मोनिका पुरोहित ने काफी प्रयास किया जिसमें कई बातें निकलकर सामने आई जैसे गीता की दांई नाक छिदी थी, दक्षिण भारत और उससे लगे हुए राज्य की महिलाएं दांई नाक छिदबाती है।
गीता ने बताया था कि रेलवे स्टेशन के पास मेटरनिटी होम है । परभणी स्टेशन के पास मैटरनिटी होम है । गीता बताती थी की रेलवे स्टेशन का नाम हिंदी और अंग्रेजी में लिखा रहता था , दक्षिण भारतीय लिपि में नहीं लिखा रहता था और उसके जिले में चावल और गन्ना की खेती होती है। गीता ने बताया था कि जिस ट्रेन में गई थी वह डीजल इंजन से चली थी और थोड़ा सूरज उग गया था । परभणी स्टेशन से सचखंड ट्रेन के आगमन का समय सुबह 10-11 बजे के दरमियान ही है I ट्रेन का इंजन पलटा था उसको लगा की वह वापिस अब उसके गांव ट्रेन जायेगी । सचखंड एक्सप्रेस में डीजल इंजन अभी तक नांदेड़ से मनमाड तक लगता है वहा अब इलेक्ट्रिक इंजन लगता है । यह ट्रेन नांदेड़ से अमृतसर जाती है । गीता पूजा पाठ करती थी पूजा पाठ गुरव समाज के लोग करते हैं। अन्य सब बातों को लेकर काफी प्रयासों के बाद गीता के मां-बाप को ढूंढने में कामयाबी मिली थी । गीता के पेट पर जलने से बने निसान के आधार पर गीता के परिवार से पहचान हुई । ज्ञानेंद्र ने बताया की गीता का घर ढूढने में जी आर पी पुलिस मुख्यालय भोपाल और इंदौर पुलिस ने बहुत मदद की । तत्कालीन इंदौर पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र , अति पुलिस अधीक्षक मनीषा पाठक सोनी, रेलवे पुलिस की इंदौर थाना प्रभारी गायत्री सोनी ने प्रारंभिक रूप से सहायता प्रारंभ की थी इसके बाद जी आर पी रेलवे पुलिस मुख्यालय भोपाल से ज्ञानेंद्र मोनिका पुरोहित द्वारा मदद मांगी गई थी । तब वे एडिशनल डीजीपी जी आर पी अरविंद कुमार से मदद हेतु मिले थे । इसके बाद जी आर पी मुख्यालय में पदस्थ अधिकारी अजहर खान ने ज्ञानेंद्र और मोनिका पुरोहित की भरपूर मदद की । जी आर पी के द्वारा गीता की सहायता हेतु ज्ञानेंद्र की टीम के साथ महिला कांस्टेबल साधना बघेल उपलब्ध कराई थी । संस्था का प्रयास है कि गीता को आठवीं की कक्षा की परीक्षा देकर किसी सरकारी नौकरी में सुविधा मिल सके इसलिए गीता आठवीं की परीक्षा देने भोपाल आई थी। गीता बोल और सुन नही पाती हैं। इस तरह से वह मूक बधिर दिव्यांग है । आनंद सर्विस सोसायटी मूक बधिर दिव्यांग बच्चों की संस्था इंदौर के ज्ञानेंद्र और मोनिका पुरोहित के विशेष प्रयासों एवं म.प्र पुलिस के सहयोग से उसके परिवार का पता लगा । ज्ञानेन्द्र और मोनिका पुरोहित संचालक आनंद सर्विस सोसायटी अभी तक 80 से ज्यादा मूक बधिर दिव्यांग जनों को उनके परिवार से मिलवा चुके है । गीता जनवरी 2021 से अपने परिवार के साथ रह रही है । गीता का परिवार बहुत गरीब है । गीता चाहती है की उसे एक सरकारी योजना में घर मिल जाए और सरकारी नौकरी मिल जाए इसलिए वह पढ़ाई कर रही है और प्रयास भी कर रही है । इनको आनंद सर्विस सोसायटी संस्था के प्रयासों से कक्षा 8 वी में मध्य प्रदेश के राज्य ओपन स्कूल से परीक्षा देने की अनुमति मिली है । यह परीक्षाएं 21 मई 2024 से 28 मई 2024 तक राजा भोज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोपाल में चली । ज्ञानेंद्र पुरोहित और मोनिका पुरोहित स्वयं गीता की विशेष रूप से सहायता कर रहे है । जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता श्री पूरन सिंह लोधी निवासी मुड़ियाखेड़ा (सांची) के द्वारा गीता के लिए भोपाल में स्थित इनके मकान में रहने,भोजन पानी की व्यवस्था की ।