रिपोर्ट धीरज जॉनसन,दमोह
दमोह जिले के अधिकांश दूरस्थ इलाकों से लगातार अवैध खनन,जंगल की लकड़ियां कटने और गुणवत्ता विहीन कार्यों के होने की जानकारी सामने आती रहती है परंतु इन पर अंकुश या सुधार परिलक्षित नहीं होता जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहे और ग्रामीणों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
ग्रामीण अंचलों में अवैध खनन
जिले के अधिकतर स्थानों से मिट्टी और मुरम की खुदाई कमाई का आसान जरिया बनती जा रही है जिस पर शायद खनिज विभाग की नजर नहीं पहुंचती है और लोग निडरता से पर्यावरण का नुकसान पहुंचा रहे है।
जबेरा के निकट कोठा/हरदुआ खुर्द गांव के पास भी इसी तरह अवैध खनन का काम जारी है जो बेरोकटोक अपने काम को अंजाम देते है और प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं आश्चर्य यह है कि जिम्मेदारों की नजर इन पर नहीं है।

ग्राम हर्रई के निकट जंगल क्षेत्र में हो रही कटाई
जिले के तेंदूखेड़ा तहसील अंतर्गत तेजगढ़ के समीप ग्राम हर्रई के पास जंगल क्षेत्र में इन दिनों अवैध लकड़ी कटाई का सिलसिला जारी है जिस पर शायद वन विभाग की नजर अब तक नहीं पहुंची है।
जंगल और वन क्षेत्र से ग्रामीण रात्रि के समय खुलेआम लकड़ी काट कर और उसे साइकिल पर लाद कर निडरता से मुख्य सड़क मार्ग से गुजर जाते है आश्चर्य यह है कि जिम्मेदारों की नजर से ये बचे हुए है।

ग्रामों में दिखाई देते है बिना प्लेटफार्म के हैंडपंप
जिले के अधिकांश ग्रामों में वैसे तो स्वच्छता अभियान जारी है जिसके लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है और इससे संबंधित पोस्टर, नारे दीवारों पर लिखे हुए भी दिखाई देते है परंतु धरातलीय स्थिति इसके विपरीत परिलक्षित होती है।
शहर से लगभग 48 किमी दूर जबेरा के निकट सुरई करोंदी में भी बिना प्लेटफार्म का हैंडपंप दिखाई देता है।आश्चर्य यह है कि अधिकांश ग्रामों में सोखता गड्ढे या नाडेफ टैंक बनाए गए है जिससे व्यर्थ पानी उसमें जा सके परंतु जहां आवश्यक है वहां इस तरह की जागरूकता सामने नहीं आती है जिससे पानी भी दूषित होता है और ग्रामीणों को गंदगी का सामना करना पड़ता है।