गुसाई मोहल्ले में शिव-पार्वती की आकर्षक झांकी
नवरात्र में पंडालों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, रंग-बिरंगी रोशनी और मनमोहक झांकियों से भक्तिमय हुआ माहौल
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
साधना, आराधना और भक्ति का महापर्व शारदीय नवरात्र क्षेत्र में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों और झांकी पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। दीवानगंज में जगह-जगह सजे आकर्षक पंडाल, रंग-बिरंगी रोशनी और माता रानी के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है।
खास बात यह है कि गुसाई मोहल्ले में स्थापित शिव-पार्वती की प्रतिमा और बालमपुर तालाब के पास बनाई गई 15 फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई हैं।

गुसाई मोहल्ले में शिव-पार्वती की प्रतिमा बनी आकर्षण: दीवानगंज के गुसाई मोहल्ला (गांधी मोहल्ला) में भक्तों द्वारा भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां हर साल शरदीय नवरात्रि पर श्रद्धालु शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर धार्मिक आयोजन करते हैं। आसपास क्षेत्र में जहां दुर्गे जी की मूर्ति स्थापित की जाती है तो वहीं दीवानगंज के गोसाई मोहल्ला में शिव पार्वती जी की मूर्ति स्थापित की जाती है और चल समारोह में दुर्गा जी की मूर्ति के साथी शिव पार्वती जी की मूर्ति का भी चल समारोह निकलता है
इस बार भी आकर्षक झांकी सजाई गई है, जिसे देखने के लिए सुबह-शाम श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रतिमा की सजावट और धार्मिक वातावरण लोगों का मन मोह रहा है।
बालमपुर तालाब के पास 15 फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा: बालमपुर तालाब के पास स्थापित मां काली की 15 फीट ऊंची प्रतिमा भी क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां लगातार दूसरे वर्ष मां काली की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा के दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शाम के समय पंडाल की सजावट और रोशनी के बीच मां काली के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ जुट रही है।

मंदिरों में सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना: नवरात्र के दौरान दीवानगंज के खेड़ापति माता मंदिर, पुराने गुरुद्वारा मंदिर, राम-जानकी मंदिर, गणेश मंदिर, शिव पार्वती जी मंदिर, अयोध्या धाम मंदिर, साहू मंदिर, खेड़ापति हनुमान मंदिर सेमरा दीवानगंज सहित गुसाई मोहल्ला और ग्वाल चमेली क्षेत्र में भी माता रानी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, शाम को माता की आरती में बड़ी संख्या में भक्त शामिल होकर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
पंडालों में भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन: क्षेत्र के विभिन्न पंडालों में प्रतिदिन भजन-कीर्तन, रामायण पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा कन्या भोज भी कराया जा रहा है। शाम होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से सजे पंडालों की छटा देखते ही बनती है। नवरात्र के पहले दिन से ही क्षेत्र में चुनरी यात्राओं का आयोजन भी किया जा रहा है, जिनमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होकर मां की आराधना कर रहे हैं। देर शाम तक श्रद्धालु विभिन्न पंडालों में पहुंचकर माता रानी के दर्शन कर रहे हैं। नवरात्रि के चौथे दिन से ही क्षेत्र के अलग-अलग गांव में चुनरी यात्रा निकलना प्रारंभ हो जाती है जो नवमी तक चलती है।
प्रातःकाल से ही मढ़माता में श्रद्धालुओं द्वारा जल अर्पित करने का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है जो दोपहर तक चलता रहता है। आने वाले दिनों में अलग-अलग झांकी पंडालो में महा आरती आयोजन किया जाएगा।