गांधी भवन में कला शिविर इंटर्नशिप कार्यशाला सातवां दिन,कला व बौद्धिक सत्र में कार्यशालाओ में बच्चो ने लिया भाग
भोपाल। शहर के श्यामला हिल्स स्थित गांधी भवन में आयोजित कला शिविर एवं इंटर्नशिप कार्यशाला का सातवां दिन कुछ खास था। इस दिन बच्चों ने सुबह 7 से 12 बजे तक कला व बौद्धिक सत्र में अलग-अलग कार्यशालायों में भाग लिया।

सातवें दिन की सुबह योग, प्राणायाम से होती है और सूरज चढ़ते तक लगभग 5 घंटे में बच्चे व युवा अपने जीवन में बहुत कुछ रचनात्मकताएं घोल चुके होते हैं। आयोजन समिति के प्रमुख साथी मोहन दीक्षित बताते हैं कि चहचहाती चिड़ियों के बीच बच्चों के अभिनय का स्वर ताल व लय मानो मानव व पक्षियों के बीच सह अस्तित्व को प्रकृति के रंग में घोल रहा हो। ओमकार का उच्चारण

व तालियों की गड़गड़ाहट के बीच ध्यान की मुद्रा पतझड़ व सावन के बीच वसंत को हृदयंगम कराती है। शांत व स्थिरचित्त से अपनी भावनाओं की कल्पना को रेखाचित्र के माध्यम से पत्थरों व कागज पर ऊकेरना निर्जीव वस्तु में सजीवता के चित्रण जैसा महसूस होता है। और इसी बीच चिड़िया उड़, मैना उड़,,,,, घोड़ा दीवानशाही पीछे देखो मार खाई,,, कबड्डी-कबड्डी, व संवैधानिक मूल्यों पर सांप सीढ़ी जैसे पारंपरिक खेल शहरी परिवेश में ग्रामीण जीवन शैली की व्यावहारिक मनोरमता को दृष्टिगत कराता है। कुछ समय बाद बच्चा समझ कर ना समझाना रे,,,, जैसे गीतों पर बच्चों, युवाओं व वयस्को के पैरों की

थिरकन मानो कोयल के गीतों पर मोर के नृत्य की थाप है। वही संगीत की कार्यशाला में स रे ग म का अभ्यास तथा जय जगत पुकारे जा जैसे जनगीत तथा गोबर कला व क्ले आर्ट में अपने हाथों से मन के भावों की कल्पना को साकार रूप देना शरीर की ज्ञानेंन्द्रियों की तन्मयता की साधना हैं जो भावभंगिमा के साथ दिल, दिमाग व हाथ को समन्वय प्रदान करती हैं। इसी बीच आए हुए अतिथियों का फूल बनाकर तथा तालियों से बारिश कराने की स्वागत परंपरा मेहमानों को भी बचपन की याद दिला देती है। तब तक सुबह के 11 बज रहे होते है फिर भी बच्चों का दिल नहीं चाहता कि वह घर जाएं और वह फुदकते हुए गांधी चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन करने लगते हैं और युवाओं के बीच इंटर्नशिप कार्यशाला में संविधान जैसे मुद्दे पर अपनी समझ अनुसार बात करते पाए जाते हैं। फिर हमें कहना पड़ता है कि अब हम कल से शिविर नहीं करेंगे यदि आप समय का पालन नहीं करोगे।

गांधी भवन न्यास के सचिव दयाराम नामदेव ने बच्चों व युवाओं के साथ गांधी चर्चा करते हुए स्वावलंबन व स्वच्छता की बात की।
आयोजन समिति के प्रमुख साथी शिवाशीष तिवारी कहते हैं कि ऐसे कला व बौद्धिक शिविर वास्तव में कम समय में ज्यादा व्यवहारिकता व अनुभव सिखाने वाले है। बच्चों को सामान्यता स्वछंदता का वातावरण तभी मिलता है जब उन्हें स्वतंत्र रखा जाए और बिना किसी अनुशासनहीनता अपनी रचनात्मकता में लीन रहने दिया जाता है तभी वह कम समय में अपनी क्षमता और उम्र के हिसाब से ज्यादा प्राप्त कर पाते हैं। जो तुरंत उनके व्यवहार में भी देखने मिलता है।

इंटर्नशिप कार्यशाला में आज युवाओं ने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों की बात की। इसकी अध्यक्षता इशिता राठौर तथा समन्वय मदीहा बेग ने किया। कोऑर्डिनेटर भगवती कड़वे ने कहा कि अपने समकक्ष साथियों के साथ वैचारिक संवाद करने से न केवल समझ विकसित होती है बल्कि हम युवा साथियों की एक जैसी परिस्थिति होने के कारण भविष्य में आने वाली समस्याओं का समाधान भी मिलता है। प्राची परसाई ने कहा कि हमें संवैधानिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारना होगा तभी हम कार्य पद्धति से लोकतांत्रिक बनेंगे। आरती धुर्वे, रश्मि, सुमन, गीता, पूजा आनंद, मेहविश, मोहन दीक्षित ने भी अपने विचार साझा किये।

योग, प्राणायाम का प्रशिक्षण अभिषेक अज्ञानी, एक्टिंग का प्रशिक्षण कुलदीप रघुवंशी, आर्ट क्राफ्ट का प्रशिक्षण प्रीति मेहरा व मेहविश, पेंटिंग व गेम्स का प्रशिक्षण पूजा बिष्ट, गीता, रश्मी व सुमन, डांस का प्रशिक्षण भगवती कड़वे, संगीत का प्रशिक्षण हर्षित तिवारी, गोबर कला व क्ले आर्ट का प्रशिक्षण सुरेश भाई, प्रदीप और लखन ने दिया।
न्यूज़ सोर्स-दयाराम नामदेव सचिव
गांधी भवन न्यास भोपाल