भोपाल। 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला का होने जा रहे प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम से पहले मध्य प्रदेश के संत समाज 2 धड़ों में बंट गया है। छिंदवाड़ा की साध्वी सरस्वती ने राजधानी भोपाल से संत शक्ति आंदोलन का ऐलान किया है। वे सनातन के लिए संत शक्ति आंदोलन की शुरुआत करने जा रहीं है। इसके लिए देशभर में साधु संतों को एकजुट किया जा रहा है। साथ ही कांग्रेस वाली लोकसभा सीटों पर विशेष जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
साध्वी सरस्वती का कहना है कि जब सनातन विरोधी पार्टियां एकजुट होकर सत्ता प्राप्त करने के लिए कार्य कर सकती हैं। तो संत एकजुट होकर सनातन का साथ देने वाली सरकार को आशीर्वाद क्यों नहीं दे सकती। अब दशकों बाद एक राजनैतिक पार्टी सनातन के लिए खड़ी हुई है और तो सभी संतो को मिलकर ऐसी पार्टी को संतों को समर्थन देने की अपेक्षा रखती हैं।
आगे साध्वी ने अपील करते हुए कहा कि सभी संतो को अपने-अपने आश्रमों, मठों व मंदिरों के हिसाब से क्षेत्र को भगवा करने की आशा जताई है। साथ ही बड़े व सुप्रसिद्ध संतो से पूरे लोकसभा क्षेत्र का निरीक्षण करने की अपील की। स्वयं साध्वी सरस्वती ने उठाया छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश का बीड़ा जहां पिछले 45 वर्षों से कमलनाथ (कांग्रेस) का सांसद है, कांग्रेस प्रभावित क्षेत्र को सतत विरोधी बताते हुए संत शक्ति आंदोलन का किया आह्वान।
इस दौरान अमरकंटक स्थित मृत्युंजय आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वतीजी ने आयोजन पर सवाल उठाने वाले शंकराचार्यों पर संतों का पलटवार करते हुए कहा कि जब जब इस धरती में धर्म की हानि होती तब तब भगवान अवतार लेते है सनातन के संतों ने कलियुग में भगवान के साथ साथ संतों का आवाहन किया कि सनातन को डेंगू मलेरिया कहने वाले लोगों को जब संत जगायेंगे। यह लोग राम पर सवाल करने वालों से जबाव क्यों नहीं लेते? सनातन को डेंगू कोरोना कहने वालों से शंकराचार्य सवाल पूछें।