दो साल पहले हुआ था डैम के निकट मिट्टी का कटाव,अब तक नहीं हुआ सुधार: ग्रामीण और किसान, पानी के लिए हो सकते है परेशान
रिपोर्ट धीरज जॉनसन,दमोह
दमोह जिले के पथरिया तहसील को पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए इसके निकट से गुजरती सुनार नदी से करोड़ों रुपए खर्च कर पेयजल की व्यवस्था की गई जिससे नगर वासियों को राहत मिली थी। परंतु दो साल पहले बारिश के समय इस डैम के निकट मिट्टी का कटाव हुआ और डैम भी क्षतिग्रस्त हुआ था जिसके सुधार के लिए टेंडर प्रक्रिया हुई परंतु अब तक यहां सुधार कार्य शुरु नहीं किया गया।
पहले तो यह कि लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद इसमें कटाव हुआ और अब अगर समय से ठीक नहीं किया गया तो आने वाले समय में पथरिया में फिर पानी का संकट आ सकता है।
वैसे भी गर्मियों के मौसम में जिले की वर्षा जनित मौसमी नदियां, जिनका सतत प्रवाह नही है उनमें पानी की कमी परिलक्षित होने लगती है जिसका प्रभाव कृषकों, ग्रामीणों सहित घरेलू स्तर पर भी
झलकने लगता है, परंतु पथरिया तहसील के ग्राम बड़े बांसा के निकट सतौआ के पास सुनार नदी पर 21 करोड़ 95 लाख की लागत से डैम बनाया गया था जिससे लोगों को पानी मिलने लगा परंतु इसके टूट जाने और मिट्टी के कटाव से कृषि भूमि का नुकसान हुआ था और पथरिया नगर को पहुंचने वाले जल आपूर्ति में भी बाधा उत्पन्न हो गई थी जिसे पुनः ठीक किया गया।
आश्चर्य यह भी है कि करोड़ों रुपए की लागत के डैम को बनाने से पहले पानी के दबाव का अंदाजा नहीं लगाया गया था और पानी ने, डैम के किनारे को तोड़ते हुए कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचाया और यहां करीब दो एकड़ भूमि इस कटाव से प्रभावित हुई थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछली बरसात में नदी के पानी से धीरे धीरे कटाव हुआ जिसके कारण खेती की जमीन खराब हुई, एक घर और उसमें रखे करीब 60 – 70 पाइप,पांच हॉर्स पावर की करीब पांच मोटर भी बह गई थी। इसे जल्द ही बनाया जाना चाहिए अन्यथा किसान और ग्रामीण परेशान होंगे। हालांकि इसे देखकर लगता है कि पूर्ण जिम्मेदारी से कार्य नहीं किया गया होगा और एक बड़ी लापरवाही भी प्रतीत हो रही है साथ ही दो साल बीतने के बाद भी इसके सुधार कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है जो चिंतनीय है। इस संबंध में पथरिया नगर परिषद के अध्यक्ष एस एल विश्वकर्मा का कहना था कि टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो गई है,जल्द ही काम शुरू हो जाएगा।

👆🏼टूटने के पहले कुछ ऐसा दिखता था दृश्य
सुनार नदी
सुनार नदी सागर जिले के केसली तहसील के टड़ा नामक ग्राम से उद्गगमित होती है और दमोह जिले में यह व्यारमा नदी मे मिल जाती है।सामान्य तौर पर इसे वर्षा जल से उत्पन्न होने वाली नदी कहा जाता है । इसमें कुछ दशक पूर्व वर्ष के अधिकतम महिनों मे जल की उपलब्धता बनी रहती थी लेकिन गिरते भूजल स्तर, ग्रामीण विधुतीकरण से विधुत की उपलब्धता से निरंतर सिंचाई और गैर कृषि क्रियाकलपों तथा सोनार नदी के किनारे बसे हुये नगर एवं नदी के किनारे से कुछ दूर अवस्थित नगर को जलापूर्ति करने से नदी का जलस्तर गिरा है यदि शासन का ध्यान नदियों के संरक्षण की ओर नहीं जाता तो निश्चित रूप से वर्षा आधारित नदियों का अस्तित्व संकट मे आ जाएगा।