सीधी पेशाब कांड और UCC को लेकर आदिवासी समाज में भारी आक्रोश, ज्ञापन सौंपने बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेड कार्यालय में एकत्र हुए आदिवासी
रायसेन- सीधी के पेशाब कांड और UCC को लेकर आदिवासी समाज में भारी आक्रोश, ज्ञापन सौंपने आदिवासी विकास परिषद के महासचिव विनोद इरपाचे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेड कार्यालय में आदिवासी एकत्र हुये,दो अलग-अलग मुद्दों को लेकर आदिवासी समाज ने कलेक्टर श्री अरविंद दुबे को ज्ञापन सौंपा।इस मौके पर पुलिस अधीक्षक विकाश कुमार शाह्बाल भी मौजूद थे।

मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद के बैनर तले एक जुट हुए रायसेन जिले के आदिवासियों ने शुक्रवार को दो अलग-अलग मुद्दो को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
आदिवासी विकास परिषद के महासचिव विनोद इरपाचे नें बताया कि सीधी जिले के कुबरी में हुई मानवता को शर्मासार करने वाली घटना से आदिवासी समाज में आक्रोष है। आदिवासियों का कहना है कि भाजपा के नेता ने जो घिनौना कृत्य किया है उससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा आदिवासी विरोधी सरकार है। यह घटना भाजपा की मनुवादी सोच एवं उसके चाल चरित्र को उजागर करती है।

महामहीम राज्यपाल के नाम कलेक्टर कों सौंपे गए ज्ञापन में आदिवासियों ने मांग की है कि भाजपा के नेता प्रवेश शुक्ला जो सत्ताधारी पार्टी के एक विधायक का प्रतिनिधि भी है, उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, उन्होंने दोषियों के विरुद्ध एसटी एससी एक्ट के तहत कार्रवाई करने एवं पीडि़त परिवार को उचित मुआवजा दिलवाने की मांग की है।

-वहीं दूसरे ज्ञापन के माध्यम से जिले के आदिवासी समाज ने समान नागरिक संहिता कानून का विरोध किया है। महामहीम राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए इस ज्ञापन के संदर्भ में आदिवासी विकास परिषद के महासचिव विनोद इरपाचे
ने बताया कि विविधता में एकता ही हमारे देश की प्रमुख विशेषता है। देश में 705 आदिवासी समुदाय ऐसे हैं जो अनुसूचित जनजाति (ट्रईबल) के रूप में सूचीबद्ध हैं। आदिवासी समाज अपने विवाह, तलाक, विभाजन, उत्तराधिकारी, विरासत, गोद लेने के मामले सदियों से चली आ रही प्रथा के तहत करते चले आ रहे हैं। लेकिन समान नागरिकता संहिता कानून लागू होने से सभी जनजातियों के प्रथागत कानून समाप्त हो जाएंगे। इस कानून से आदिवासियों के रीतिरिवाज कमजोर होंगे और मातृसत्तात्मक एवं पितृसत्तात्मक दोनों के ही ढांचे में खलल पड़ेगा और वे टूट जाएंगे। आदिवासियों ने बताया कि समान नागरिकता संहिता कानून लागू होने से उनके अधिकारों का हनन होगा, उनकी धर्म, संस्कृति नष्ट हो जाएगी। आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार आदिवासियों से उनके जंगल और जमीन छीनना चाहती है ताकि इन जमीन के नीचे छिपे खनिज और अन्य संसाधनों को आसानी से बैचा जा सके। इन आदिवासियों ने महामहीम राष्ट्रपति से मांग की है कि समान नागरिक संहिता कानून लागू न किया जाए, अगर ऐसा किया जाता है तो आदिवासी समाज अपनी पहचान खो देगा और पूरी तरह से मिट जाएगा।