Let’s travel together.

जाति प्रमाण पत्र के लिए वंशावली की खोज में निकले थे घर से सड़क हादसे में हुई मौत

71

रायपुर। जाति प्रमाण पत्र के लिए वंशावली की खोज में भटक रहे प्रभु धुरू नामक आदिवासी की बुधवार शाम चरोदा पुल के ऊपर सड़क हादसे में दर्दनाक मौत गई। सड़क हादसों में असमय मृत्यु धरसींवा क्षेत्र के लिए कोई नई बात नहीं। बेतरतीब ढंग से बनी सिक्स लाइन ओर सर्विस रोड खूनी सड़क के रूप में पहचान बना चुका है। मंगलवार की शाम भी सांकरा में एक व्यक्ति की सड़क हादसे में दर्दनाक मृत्यु हुई थी। लेकिन बुधवार की शाम प्रभु धुरू नामक आदिवासी की मृत्यु कई अनुत्तरित प्रश्नों को जन्म दे गई। जाति प्रमाण पत्र के लिए शुरू सफर उसकी मृत्यु पर आकर खत्म हो गया। मृतक प्रभु धुरू की तीन बेटियां हैं एक बेटा है, जिनमें दो का विवाह हो चुका है। जाति प्रमाण पत्र न बन पाने से मृतक की चारों संताने उच्च शिक्षा से वंचित रह गयी।

दो बाइक से 4 लोग गए थे वंशावली की खोज में

मृतक प्रभु धुरू के समधी नन्दकुमार मरकाम ने बताया कि हम लोग दो बाइक से कुल 4 सदस्य रायपुर सेजबहार दतरेंगा से हथबन्ध गए थे। उनके समधी की तीन बेटियों में से एक उनके बेटे को ब्याही है, जाति प्रमाण पत्र के अभाव में उनकी बेटियां उच्च शिक्षा व सरकरी नोकरी में आवेदन करने से वंचित रह गई । लेकिन बच्चों के लिए जाति प्रमाण पत्र जरूरी है। इसीलिए बुधवार को मृतक प्रभु धुरू एक बाइक पर एक दामाद को लेकर ओर दूसरी बाइक पर वह अपने बेटे को साथ लेकर हथबन्ध गए थे। हथबन्ध में दिनभर अपने पूर्वजों के बारे में पता किये लेकिन कोई जानकारी हाथ नहीं लगी। शाम को वापस रायपुर तरफ आ रहे थे कि चरोदा पुल के ऊपर उनके समधी की बाइक को पीछे से तीव्र रफ्तार कार ने टक्कर मारी ओर काफी दूर तक घसीटते ले गया जिससे उनके समधी की मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना में बाइक के पीछे बैठा उनका दामाद गंभीर रूप से घायल है ।

5 पीढ़ियों की वंशावली चाहिए

मृतक प्रभु धुरू के समधी नन्दकुमार मरकाम ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र के लिए 5 पीढ़ियों की वंशावली चाहिए लेकिन पुराने समय मे कोई रिकार्ड नहीं रखते थे इसलिए बहुत दिक्कत आ रही है।

मृतक बहुत छोटे में दादाजी के साथ आकर रायपुर में बसे थे

मृतक के समधी नन्दकुमार मरकाम ने बताया कि मृतक जब बहुत छोटे थे तब अंत गांव से आकर यहां रायपुर में बसे थे जाति प्रमाण पत्र के लिए वंशावली के प्रमाण मांगे गए थे उनके समधी को ऐंसी जानकारी मिली कि उनके पूर्वजों का पुराना गांव हथबन्ध रहा है इसलिए वहां गए थे लेकिन हथबन्ध में कोई जानकारी हांसिल नहीं हुई उल्टा वापसी के समय दर्दनाक हादसा होने से उनके समधी की भर्ती अवश्य हो गई।

मृत्यु किसकी

इस दर्दनाक हादसे में मृत्यु भले ही प्रभु धुरू की हुई हो लेकिन वास्तविकता के धरातल पर मृत्यु किसकी हुई कहीं उस सिस्टम की तो नहीं जिसके कारण सख्त नियमों के चलते एक आदिवासी जाति प्रमाण पत्र के लिए वंशावली की खोज में दिन- रात इधर उधर भटकता रहा ओर अंततः बुधवार की शाम प्रभु धुरू की मृत्यु हो गई।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

पुलिस की बड़ी सफलता, पीथमपुर से मिलीं दो लापता नाबालिग बालिकाएँ     |     खुनखुन बाग वाले हनुमान जी महाराज के दरबार में सीताराम महायज्ञ एवं राम कथा का हुआ समापन     |     किसानों ने देर रात केंद्रीय मंत्री के बंगले पर दी दस्तक,नहर के लिए फिर उठी आवाज,मंत्रीजी ने दिया आश्वासन     |     भगवंतपुर में 28 लाख की लागत से बना नवीन आंगनवाड़ी केंद्र का  विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी ने किया लोकार्पण     |     भविष्य से भेंट कार्यक्रम का हुआ आयोजन      |     कयामपुर में बाघ का हमला: किसान की गाय का शिकार, ग्रामीणों में दहशत     |     गढ़ी वन क्षेत्र में सागौन तस्करों पर कार्रवाई: 60 हजार की लकड़ी के साथ वाहन मालिक व साथी गिरफ्तार     |     भविष्य से भेंट कार्यक्रम में एसडीएम ने दिए सफलता के मंत्र, छात्रों को मिला कैरियर मार्गदर्शन     |     किसानों की समस्याओं को लेकर संगठन ने सौंपा ज्ञापन, विभिन्न मांगों पर कार्रवाई की मांग     |     बेगमगंज क्षेत्र में कई गांव में ओलावृष्टि से किसानों की चिंता बढ़ी     |    

Don`t copy text!
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9425036811