मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
विकासखंड सांची के ग्राम केमखेड़ी के ग्रामवासी पीने के पानी के संकट से जूझ रहे हैं। इस चिलचिलाती धूप में भी एक-एक कुप्पी पानी के लिए महिलाओं को पसीना बहाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में एक भी हैंडपंप नहीं है। वे निजी ट्यूबवेल पर शुल्क देकर लंबी-लंबी लाइनों में लगकर पानी भरकर लाते हैं। वहीं पानी भरने को लेकर ग्रामीणों में हर दिन विवाद और झगड़े होते हैं। गायत्री बाई ने बताया कि गांव में एक भी हैंडपंप नहीं है। इसलिए उन्हें निजी ट्यूबवेल से 300 रुपए महीने देकर पानी भरना पड़ रहा है। उस पर भी भीड़ इकट्ठा हो जाती और पानी भरने को लेकर लड़ाई होती है। लगभग दस साल से ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं। मगर पीएचई विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने यहां पर नल-जल योजना नहीं तैयार की।
ऐसे में निजी ट्यूबवेल पर दिन भर पानी भरने के लिए महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की कतार लगी रहती हैं। पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों का दिन भर पानी भरने में ही बीत जाता है, जिससे वह मजदूरी भी नहीं कर पाते
जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2023 तक सभी गांवों में नल से जल पहुंचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों के विकास के साथ-साथ लोगों के कल्याण और विकास के लिए भी प्रमुखता से काम कर रही है। सरकार जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर में नल से जल पहुंचा रही है, ताकि महिलाओं को पानी की समस्या से निजात मिल सके। उन्हें घर पर ही नल से पानी उपलब्ध होगा, कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं होगी। केमखेड़ी गांव में पेयजल की सुविधा नहीं पीएचई विभाग के अधिकारी जल जीवन मिशन योजना को गंभीरता से नहीं ले रहे।