इसके बाद मुस्लिम जगत ने घटना की कड़ी निंदा की है और इससे अशांति की आशंका पैदा हुई है क्योंकि फलस्तीनी उग्रवादीसमूहों ने इसके जवाब में कार्रवाई की धमकी दी है। संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन के राजदूत रियाद मंसूर ने अरब देशों के राजदूतों 57-सदस्यीय इस्लामी सहयोग संगठन 120-सदस्यीय गुटनिरपेक्ष आंदोलन तथा अन्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद कहा कि न केवल बेन-गविर की यात्रा को लेकर बल्कि इजरायल के इतिहास में सबसे चरमपंथी सरकार के इर्द-गिर्द व्यापक अतिवाद के वातावरण की कड़ी निंदा की गई है।
उन्होंने इजराइल पर न केवल अल अक्सा मस्जिद सहित मुस्लिम धर्मस्थलों के खिलाफ बल्कि कब्रिस्तान सहित ईसाइयों के पवित्र स्थलों के खिलाफ आक्रामकता का आरोप लगाया है। टेम्पल माउंट को यहूदी लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थान बताते हुए बेन-गविर ने इस स्थल पर यहूदियों की यात्रा के विरोध की कड़ी निंदा की है और इस नस्लवादी भेदभाव करार दिया है।

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि राजनीतिक और शांति बहाली मामलों के सहायक महासचिव खालिद खियारे की बैठक में सुरक्षा परिषद को स्थिति की जानकारी देने वाले हैं। संयुक्त राष्ट्र में जॉर्डन के राजदूत महमूद हमूद ने कहा कि उनका देश इजराइल के मंत्री बेन-गविर और इजरायल सरकार की घुसपैठ को लेकर बेहद चिंतित है। हमूद ने कहा यह उग्रवाद की एक कार्रवाई है जो हिंसा का एक नया दौर शुरू करती है। सुरक्षा परिषद को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी और इस तरह के प्रयासों को रोकना होगा।