एनएमसीजी (NMCG) ने बुलाई अंतर-विभागीय बैठक
रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
बेतवा नदी के प्रदूषण को जड़ से खत्म करने और एक व्यापक स्वच्छता कार्ययोजना तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता मिशन के कार्यकारी निदेशक बृजेंद्र स्वरूप ने की। इस दौरान मंडीदीप से लेकर विदिशा तक नदी के गिरते जल स्तर और बढ़ते प्रदूषण (TRS 2) पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
सभी प्रमुख विभागों को एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश
नदी की सफाई को महज एक विभाग का काम न मानकर, कार्यकारी निदेशक ने सभी संबंधित विभागों से एक एकीकृत रिपोर्ट (Comprehensive Report) मांगी है। बैठक में यह तय किया गया कि नदी में गिरने वाले औद्योगिक और घरेलू कचरे को रोकने के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) नीति पर काम किया जाएगा।
बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी और विभाग
नदी संरक्षण की इस मुहिम में प्रशासन के लगभग सभी अंगों ने सहभागिता दिखाई। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारी उपस्थित रहे!
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: क्षेत्रीय अधिकारी रजत पाटीदार (MPPCB) ने औद्योगिक प्रदूषण पर अपनी रिपोर्ट साझा की।
प्रशासनिक नेतृत्व: निलेश सरवटे (तहसीलदार) और अखिलेश कुमार द्विवेदी (परियोजना अधिकारी, मनरेगा, रायसेन) ने जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन और ग्रामीण भागीदारी पर जोर दिया।
औद्योगिक विकास: एमपीआईडीसी (MPIDC) से राजेश विजयवर्गीय (AE) और सहायक प्रबंधक यशवंत काजवे (DIC, मंडीदीप) ने फैक्ट्रियों से निकलने वाले अपशिष्ट प्रबंधन का रोडमैप रखा।
स्थानीय निकाय: निखिल कटाले (CEO, जनपद पंचायत), सतीश उज्जैनिया (Sub Engg., नगर पालिका मंडीदीप) और हिमांशु मेहरा (Sub Engg., ओबेदुल्लागंज) ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की योजनाएं प्रस्तुत कीं।
* जल संसाधन एवं वन: विकास अमलानी (AE, WRD) और कुंज पांडे (SRO, फॉरेस्ट) के साथ राहुल भारद्वाज (रेंज ऑफिसर) ने नदी के जल संवर्धन और तटों पर वृक्षारोपण की संभावनाओं पर चर्चा की।
मुख्य एजेंडा: अवैध निर्माण और प्रदूषण पर प्रहार
बैठक में अवैध निर्माण को नदी के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बताया गया। बृजेंद्र स्वरूप ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नदी के डूब क्षेत्र (Floodplain) में किसी भी प्रकार का निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, BOD, COD और कोलीफॉर्म के स्तर को कम करने के लिए ईटीपी (ETP) और एसटीपी के आधुनिक तकनीक से संचालन की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बैठक के अंत में सभी विभागों को एक सप्ताह के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट और आगामी कार्ययोजना सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बेतवा नदी को एक बार फिर अविरल और निर्मल बनाया जा सके।