सी के पारे रायसेन
बम्होरी वेयरहाउस रायसैन में प्राथमिक सहकारी समिति के प्रशासक मनोज शर्मा द्वारा चना खरीदी केंद्र का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर केंद्र पर स्थापित तौल- कांटा, मशीन की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। पूजा के बाद उपस्थित लोगों ने केंद्र के सुचारू संचालन की कामना की।
शासन की नीति के अनुसार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से चना खरीदी केंद्र स्थापित किया गया है। इस केंद्र के माध्यम से क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा मिलेगी और उन्हें शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य का लाभ भी प्राप्त होगा।
केंद्र पर चना खरीदी की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, लेकिन किसानों की ट्रॉलियां केंद्र पर नहीं पहुंचने के कारण पहले दिन खरीदी का कार्य शुरू नहीं हो सका। अधिकारियों द्वारा किसानों से संपर्क कर उन्हें अपनी उपज केंद्र पर लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि खरीदी प्रक्रिया नियमित रूप से संचालित हो सके।
प्रशासन का कहना है कि जैसे ही किसान अपनी उपज लेकर केंद्र पर पहुंचेंगे, वैसे ही खरीदी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए केंद्र पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। तौल के लिए मशीनें, रिकॉर्ड संधारण की व्यवस्था और किसानों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

शासन द्वारा चना खरीदी को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन्हीं दिशा-निर्देशों के अनुसार केंद्र पर किसानों का पंजीयन, तौल प्रक्रिया और भुगतान की व्यवस्था की जाएगी। किसानों को उनकी उपज का भुगतान शासन की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा।
अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे शासन की योजना का लाभ उठाएं और निर्धारित समय पर अपनी उपज केंद्र पर लाकर विक्रय करें। इससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त होगा और बिचौलियों से भी राहत मिलेगी।
केंद्र के शुभारंभ के दौरान वेयरहाउस परिसर में सुभाष शुक्ला, प्रहलाद यादव, नितेश यादव, बंटी यादव, रघुवंशी जी वेयरहाउस कर्मचारी विष्णु लोधी,हम्माल सहित अन्य सहयोगी उपस्थित रहे। सभी ने केंद्र के सफल संचालन के लिए सहयोग का भरोसा दिलाया।
स्थानीय किसानों ने भी चना खरीदी केंद्र शुरू होने पर संतोष व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर केंद्र पर पहुंचेंगे। इससे क्षेत्र में कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों को आर्थिक रूप से लाभ होगा।