स्कूल में लटका मिला ताला, न शिक्षक मिले न छात्र; ‘वर्क फ्रॉम होम’ के दावे पर उठे सवाल
रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
मंडीदीप क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय सिमरोदा में शिक्षकों की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। स्कूल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे पत्रकारों को विद्यालय में ताला लटका मिला, जबकि वहां न कोई शिक्षक मौजूद था और न ही कोई छात्र। इस घटना ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब चार पत्रकार विद्यालय पहुंचे, तो दोनों स्कूल बंद मिले। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि विद्यालय में लंबे समय से समय से पहले ताला बंद करने और मनमानी ढंग से संचालन जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी देखी गई।

शाला प्रभारी पर उठे सबसे बड़े सवाल
जानकारी के अनुसार विद्यालय में कुल 5 शिक्षक पदस्थ हैं, जो बच्चों को शिक्षा देने के लिए नियुक्त हैं। लेकिन निरीक्षण के दौरान किसी भी शिक्षक की अनुपस्थिति ने विभागीय अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए। सबसे अधिक सवाल शाला प्रभारी मुकेश चौहान की भूमिका पर उठ रहे हैं, जो स्वयं भी विद्यालय में उपस्थित नहीं थे।
बताया जा रहा है कि उन्होंने न तो स्कूल का प्रभार किसी अन्य शिक्षक को सौंपा और न ही इस संबंध में चिकलोद संकुल को कोई अधिकृत सूचना दी। ऐसे में यह मामला केवल अनुपस्थिति तक सीमित न रहकर प्रशासनिक लापरवाही का भी रूप लेता दिखाई दे रहा है।
‘वर्क फ्रॉम होम’ का दावा, विभाग ने बताया भ्रामक
मामले को लेकर जब शाला प्रभारी मुकेश चौहान से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कथित रूप से कहा कि वे “वर्क फ्रॉम होम” कर रहे हैं। इस दावे ने पूरे मामले को और अधिक विवादित बना दिया।
जब इस विषय पर चिकलोद संकुल प्रभारी संतोष दुबे से चर्चा की गई, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि“शिक्षकों के लिए विद्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य है। किसी भी शिक्षक द्वारा वर्क फ्रॉम होम नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा कहा गया है तो यह गलत जानकारी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

एसएफएल मेले का आयोजन भी नहीं हुआ
विद्यालय में जिस दिन एसएफएल मेले का आयोजन होना था, उसी दिन स्कूल में न शिक्षक मिले और न ही छात्र। इससे यह स्पष्ट होता है कि न केवल नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, बल्कि विभागीय कार्यक्रमों की भी खुलेआम अनदेखी की जा रही है। यह स्थिति बच्चों की शिक्षा और भविष्य दोनों के लिए चिंताजनक है।
मुख्यमंत्री की शिक्षा सुधार मुहिम पर पानी फेर रहे लापरवाह कर्मचारी
एक ओर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार की घटनाएं उनकी मंशा और योजनाओं पर पानी फेरती नजर आती हैं। सिमरोदा स्कूल का मामला यह बताने के लिए काफी है कि जमीनी स्तर पर अब भी कई जगह शिक्षा विभाग के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी
घटना के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि जिन शिक्षकों को बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी दी गई है, यदि वही अपनी ड्यूटी के प्रति गंभीर नहीं हैं, तो इसका सीधा नुकसान बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।
लिखित शिकायत की तैयारी
मामले को लेकर अब मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और जिला शिक्षा अधिकारी रायसेन तक लिखित शिकायत भेजने की तैयारी की जा रही है। मांग की जा रही है कि यदि जांच में लापरवाही सिद्ध होती है, तो जिम्मेदार शिक्षकों, विशेषकर शाला प्रभारी मुकेश चौहान के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।