– मप्र शिक्षक संघ एवं शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने दिया ज्ञापन
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
मप्र शिक्षक संघ एवं संयुक्त शिक्षक मोर्चा द्वारा टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता संबंधी आदेश के विरोध में मंगलवार को संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने राज्य शासन से उक्त आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है। ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम एवं बीईओ को दिए गए।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। जबकि शिक्षकों का कहना है कि वे पूर्व में निर्धारित नियमों एवं भर्ती प्रक्रियाओं के तहत नियुक्त हुए हैं और वर्षों से सेवा दे रहे हैं। ऐसे में सेवा शर्तों में बदलाव करना न्यायोचित नहीं है। शिक्षकों ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए बताया कि नियुक्ति के बाद सेवा शर्तों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि वर्ष 2005 से लेकर 2013 तक की भर्तियों में नियुक्त शिक्षक पहले से निर्धारित पात्रता परीक्षाएं उत्तीर्ण कर चुके हैं और लंबे समय से अध्यापन कार्य कर रहे हैं।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि अन्य राज्यों में इस तरह के मामलों में पुनर्विचार याचिकाएं लंबित होने तक ऐसे आदेशों को स्थगित रखा गया है। इसी आधार पर मध्यप्रदेश शासन से भी मांग की गई है कि टीईटी अनिवार्यता के आदेश को फिलहाल स्थगित कर पुनर्विचार किया जाए। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में मप्र शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष गिरीश चंदेल, प्रदीप राय, संयुक्त मोर्चा अध्यक्ष विनेश साहू, गिरीश शर्मा, शिवनारायण, नारायण दास, राकेश शर्मा, वीरेंद्र ठाकुर, कालूराम, जाकिर, हरिशंकर, शिवराज यादव, लीलाधर खंगार, सिराज खान, संतोष राय, संतोष साहू, आदेश चंद्रवंशी, महेंद्र वर्मा, देवेन्द्र, प्रमोद पठ्या, मनोज मालवीय, अशोक, हेमचंद, गप्पू लाल, विपिन, अरविंद गौर, लोकेश, इरफान, जगदीश, जितेन्द्र, जितेन्द्र राय, नंथन लाल, नीलू मालवीय, लक्ष्मण गुर्जर, देवेन्द्र जाट, महेंद्र राजपूत, प्रशांत, व्रजेश शर्मा, रामनारायण, प्रेमनारायण सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।