भोपाल।उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आपातकाल में जिस तरह से लोकतंत्र का अपहरण हुआ, इस विषय में जानने की सबसे ज्यादा जरूरत युवाओं को है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र लंबे समय के संघर्ष के बाद स्थापित हुआ और देश की बेहतरी के लिए हुआ था। देश को फिर से विश्व गुरु के स्थान पर पहुंचाकर दुनिया का नेतृत्व करने के लिए हुआ था, जिससे दुनिया में शांति की स्थापना हो सके और हम लोकतंत्र को अमर बना सकें।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल गुरुवार को भोपाल में हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी न्यूज एजेंसी और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के तत्वावधान में आयोजित देश में आपातकाल की घोषणा के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘आपातकाल और युवा’ विषय पर केंद्रित राष्ट्रीय विमर्श को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सत्ता के सदुपयोग और दुरुपयोग में क्या अंतर होता है यह हम सभी ने देखा। जब सत्ता का दुरुपयोग होता है तो स्थिति विकट हो सकती है, ये आपातकाल में हम लोगों ने देखा। जनता के आशीर्वाद से मिली हुई सत्ता इस बात के लिए नहीं है कि जो कुर्सी हमारे हाथ से जाने का खतरा आ जाए और वह भी उच्च न्यायालय के आदेश पर, तो हम ऐसी स्थिति पैदा कर दें कि लाखों लोगों को जेल के अंदर ठूस दिया जाए, प्रताड़ना दी जाए, प्रेस की स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया जाए इससे भयावह स्थिति नहीं हो सकती। उन लोगों के लिए इससे बड़ी चिंता का विषय नहीं हो सकता कि लोगों ने लोकतंत्र की स्थापना एक बड़े मिशन की पूरा करने के लिए गई थी।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने जब जनसंघ की पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक की तो उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया था कि समाज के अंतिम छोर पर बैठा व्यक्ति जिस दिन मुस्कराकर कह दे कि अब किसी प्रकार की समस्या हमारे सामने नहीं। हमारी सारी समस्याओं का समाधान हो गया, उस दिन मान जाना कि आपका राजनीति में आने का उद्देश्य पूरा हो गया।

उन्होंने कहा कि एक तरफ यह विचार है और दूसरी तरफ इस प्रकार के विचार हैं कि यदि उच्च न्यायालय ने हमारे खिलाफ निर्वाचन को अवैध कर दिया तो हमने उच्च न्यायालय के आदेश का पालन किए बिना फिर से नया जनादेश प्राप्त करें, उस दिशा में जाने की बजाए अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी जैसे और ऐसे असंख्य राजनीति में काम करने वाले वरिष्ठ नेताओं को रात के अंधेरे में पकड़-पकड़कर जेल के अंदर पहुंचाकर जिस तरह से प्रताड़ना दी, इसके बड़ा राजनीतिक अपराध और कुछ नहीं हो सकता और ये आपातकाल के दौरान हुआ। उसके बाद जब जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हिम्मत न हारते हुए प्रयास जारी रखा ताकि देश गलत दिशा में न जा पाए। उस समय राम बहादुर राय का भी मैं स्मरण करना चाहता हूं, जिनकी जयप्रकाश नारायण के साथ उन योजनाओं को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है कि किस तरह से आपातकाल की विपरित परिस्थितियों से निपटना है और किस तरह से आगे की कार्ययोजना बनानी है। इसके बाद अंततः इस प्रकार की राजनीति की समाप्ति हुई। जनता पार्टी की सरकार बनी और उस मानसिकता को समाप्त करने का काम हुआ, जिस मानसिकता ने राजनीति को एक परिवार तक सीमित रखने का काम किया। अभी भी उस मानसिकता के लोग उससे उबरे नहीं हैं, अभी भी लगातार प्रयास कर रहे हैं। इतनी बड़ी पार्टी जो सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है, उस पार्टी में कोई एक भी ऐसा नेतृत्व नहीं तैयार कर सके, जो देश की राजनीति में पार्टी को आगे ले जाने के लिए सामने आए।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का सौभाग्य है कि भारत आर्थिक महाशक्ति बन रहा है। चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हमारा देश बन चुका है। ये युवाओं के लिए संतोष की बात है, क्योंकि आगे उनका लम्बा भविष्य है, लेकिन आर्थिक महाशक्ति बनने के साथ-साथ हमारी संस्कृति, हमारी विरासत और इसी लिए प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि विरासत से विकास। हम अपना एक पैर जमीन में जमाकर और लम्बी छलांग लगाने की दिशा में देश को आगे ले जाने का काम होना चाहिए, जिससे विकास हमारे लिए अभिशाप न बने, बल्कि वरदान बने। इसलिए आपातकाल के जो कठिन दौर रहे हैं, सारे युवाओं को उसको पढ़ना चाहिए। युवा जो देश को आगे ले जाने का काम करेंगे, उन्हें पीछे की ओर सिंहावलोकन करने की आवश्यकता है।