मौसम साफ नहीं रहने से ईट भट्टों के कारोबार में आई कमी।
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
फरवरी के पहले सप्ताह में गिरी मावट ने ईट भट्टों के व्यवसायियों को काफी नुकसान हुआ है। अच्छे मौसम के चलते ईंट व्यवसायी कच्चे ईंट की पथाई का काम तेज गति से करा रहे थे। तैयार कच्चे ईंटों को दो दिन की बरसात ने काफी नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र के बालमपुर,देहरी , गीदगड, मुड़िया खेड़ा, भारतीपुर, शाहपुर, आदि स्थानों पर संचालित भट्ठों पर ईंट पथाई का काम प्रभावित हो गया है। ईंट व्यवसायों ने कहा कि कई सालों से जनवरी और फरवरी माह ईंट उद्योग के लिए अच्छा जा रहा था। मौसम साफ होने के चलते मजदूर पथाई कर रहे थे। अचानक बारिश होने से जमीन पर पथाई कर छोड़े गए ईंटो को नहीं सहेजा जा सका। उसे पकाने के लिए भट्ठे में नहीं डाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि कच्चे ईंट की पथाई के लिए मजदूरों को एक हजार रुपये प्रति हजार की दर से देना पड़ता है। हजारों की संख्या में पथाई गईं ईंट खराब होने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। दो दिन हुई बारिश से हर ईंट व्यापारी का दो से तीन लाख का नुकसान हुआ है। बारिश से हुए नुकसान को देखते हुए सरकार को टैक्स में छूट देकर मदद करनी चाहिए। वही बे मौसम बारिश ईंट भट्ठा उद्योग के लिए आफत बन गई। देर रात आई बरसात के कारण लाखों रुपए की कच्ची ईंटे खराब हो गई। तथा काफी ईटों की गुणवत्ता प्रभावित हो गई है। कई व्यवसाईयों ने ईट भट्टों के ऊपर प्लास्टिक की पन्नी डालकर बचाने की काफी कोशिश की लेकिन फिर भी काफी ईंटें भीग गई। ईंट उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक बरसात से जिले में इस उद्योग को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
ईंट का व्यापार करने वालो ने बताया कि दीवानगंज के आसपास के ग्रामीण इलाकों में कई जगह ईट को कोयले से पकाया जाता है। इस साल महंगाई के कारण 10 से 12 भट्ठे आर्थिक मंदी के कारण पहले ही बंद है। अगर यही हालात रहे तो अगले साल तक आधे ईंट भट्ठे बंद हो जाएंगे। वहीं बरसात के कारण एक सप्ताह तक ईंट भट्टे पर कार्य बंद हो जाने के कारण मजदूर भी मायूस नजर आ रहे है।