अतिरिक्त संचालक के निरीक्षण में साथ दिखे जैसीनगर सरकारी कॉलेज के अतिथि विद्वान सुरेन्द्र तिवारी
विशेष संवाददाता भोपाल
दमोह शहर के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में उच्च शिक्षा विभाग सागर संभाग के अतिरिक्त संचालक के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान उनके साथ सागर जिले के जैसीनगर स्थित सरकारी कॉलेज के राजनीतिशास्त्र विषय के अतिथि विद्वान डॉ. सुरेन्द्र तिवारी अपने एक हाथ में कॉपी–रजिस्टर लिए और दूसरें हांथ से मोबाइल से फोटो खींचते दिखाई दिये। कक्षाओं में प्रवेश करते और प्राचार्य कक्ष में भी साथ दिखाई दिए जो स्टाफ के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
विदित हो कि 10 दिसंबर को उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री तथा दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार जीएसटी बचत उत्सव में शामिल होने कॉलेज के ऑडिटोरियम में पहुंचे थे जहां कॉलेज में मंत्री द्वारा किए गए निरीक्षण में मिली कमियों के मद्देनज़र अगले ही दिन अतिरिक्त संचालक ने कॉलेज का पुनः निरीक्षण किया।
निरीक्षण के बाद अतिरिक्त संचालक ने कहा कल यहां उच्च शिक्षा मंत्री आए थे। यहां जो कमियां पाई गई उनके प्रति हमारा ध्यान आकर्षित किया गया।उनके परिपालन में विजिट किया।जो भी मैंने पाया उसका प्रतिवेदन शासन और कमिश्नर को भेजूंगा जो भी उसमें कार्रवाई होगी मैं अपनी अनुशंसा सहित उस कार्यवाही को अंजाम तक लेकर जाऊंगा।
परंतु जब उनसे पूछा गया कि निरीक्षण दल में उनके साथ आए व्यक्ति कौन हैं, तो उन्होंने सीधा उत्तर देने से परहेज़ करते हुए केवल इतना कहा
“वो नहीं हैं… छोड़ने आए थे, उन्हें यहां आना था।”

उनका यह अस्पष्ट जवाब पूरे प्रकरण को और चर्चा का विषय बना गया। अस्पष्ट इसलिए क्योंकि अतिरिक्त संचालक जिस वाहन से आये हुये थे उस कार के आगे नेम प्लेट लगी हुई थी जिस पर अतिरिक्त संचालक लिखा हुआ था प्रथम दृष्टया यह सरकारी वाहन प्रतीत होता है यदि तिवारी को छोड़ने आये थे, तो छोड़ कर चला जाना था, जबकि वे पूरे समय अधिकारियों के साथ रहकर फ़ोटो ग्राफी और सरकारी कार्यों में अधिकारी के साथ हांथ बंटाते हुये देखे गये। इस तरह अतिरिक्त संचालक का यह जबाब गैर जिम्मेदाराना और पत्रकारों को गुमराह कर अपने पद की गरिमा के विरुद्ध प्रतीत होता है।

इधर, जैसीनगर कॉलेज से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि डॉ. तिवारी कॉलेज में नियमित उपस्थिति नहीं देते और कभी–कभार ही दिखाई देते हैं।कोई उनसे इसलिए भी कुछ नहीं कहता है क्योंकि वे अतिरिक्त संचालक से संपर्कों का फायदा लेते है।छात्रों को पढ़ाने में वे कभी रुचि नहीं लेते है। तिवारी अधिकारियों की चापलूसी और उनका विश्वास जीत कर उन्हें विभिन्न कॉलेज की सूचनाएं देकर उन्हें भी भ्रमित करते है फिर झूठी शिकायतें कर अन्य लोगों पर दबाव बनाते और परेशान करते है।इनके मोबाइल की भी जांच होना चाहिए। हालांकि, जब इस संबंध में जैसीनगर के प्रभारी प्राचार्य से बात की गई, तो उन्होंने इस विषय पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

सूत्रों ने यह भी बताया कि डॉ. तिवारी पूर्व में दमोह जिले के पथरिया के सरकारी कॉलेज में भी अतिथि विद्वान रह चुके हैं। वहां भी छात्रों और स्टाफ के साथ उनके व्यवहार एवं गतिविधियों को लेकर समय–समय पर असंतोष की स्थिति सामने आती रही थी।वे संस्था प्रमुख के खास बनकर पूरे स्टाफ की झूठी शिकायत करते और विवाद की स्थिति निर्मित करते थे,अन्य अतिथि विद्वानों को परेशान करते थे।और अब जबकि उन्हें जैसीनगर के कॉलेज में छात्रों को पढ़ाने के लिए उपस्थित रहना चाहिए तो वे दमोह में दिखाई दे रहे है। अतिरिक्त संचालक को इस विषय पर भी संज्ञान लेना चाहिए और जैसीनगर के सरकारी कॉलेज की सीसीटीवी फुटेज की जांच होना चाहिए।
अतिरिक्त संचालक के साथ एक अतिथि विद्वान का निरीक्षण के दौरान मौजूद रहना, उनकी भूमिका स्पष्ट न होना और इस पर असहज जवाब, इन सभी बातों ने पूरे घटनाक्रम को सवालों के घेरे में ला दिया है। अब देखना यह है कि अतिरिक्त संचालक द्वारा भेजे जाने वाले प्रतिवेदन में इस विषय का उल्लेख होता है या नहीं