विजी लवानिया गौहरगंज रायसेन
09 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष में विशाल वाहन रैली, बाइक एवं पैदल रैली का आयोजन किया गया था। उक्त अवसर पर आदिवासी भारी संख्या में तारानगर गांतव्य तक पहुंचे। औबेदुल्लागंज से गौहरगंज तारानगर पहुंचकर रैली समापन किया।आयोजनकर्ता से बात करने पर उन्होंने बताया कि वह बेहद खुश है, कार्यक्रम को लेकर साथ ही कार्यक्रम की पूर्व में सूचना सभी संबंधित थाना प्रभारी को लिखित तौर पर दे दी गई थी एवं सभी को आदिवासी दिवस के बारे में पता था, उसके बाद भी उन्हें किसी भी प्रकार की सुरक्षा नहीं प्राप्त हुई। उक्त स्थल पर कोई जनप्रतिनिधि उपस्थित नहीं था।

आदिवासियों से दूरी करना और वोट के समय आदिवासी हितो की बात करना नेताओं की चाल है। सूत्रों के मुताबिक रैली में चलते हुए उन्हें ट्रैफिक संबंधी समस्या हूई, पुलिस प्रशासन की गैर मौजूदगी में आयोजनकर्ताओ ने वॉलिंटियर लगाकर ट्रैफिक सँभालने का काम किया। रैली में बड़ी संख्या में माताएं एवं बहने शामिल होती है, उनकी सुरक्षा के कोई इंतेजामत नहीं थे।बताया गया कि कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा रैली सफल न होने देने के उद्देश्य से रैली में मिलकर उपद्रव करने की कोशिश की गई।

प्राप्त जानकरी के अनुसार दूसरे आने जाने-वाले वाहनों को पहले से दिशा निर्देश न मिलने के कारण कई बार वह परेशान होते हुए नजर आए। आदिवासियों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों को अव्यवस्थाओं का सामान करना पड़ा। उक्त स्थल पर उपद्रव की स्थिति बनी रही। पुलिस प्रशासन का आदिवासीय समुदाय के कार्यक्रमों को लेकर रवैया से नाराज आदिवासी सिर्फ दिखने के लिए पुलिस प्रशासन हमारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए आया। उसके बाद पुलिस प्रशासन का कोई तो पता नहीं। इस प्रकार का रवैया पुलिस प्रशासन का ठीक नहीं रहा। अगर कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की अनुहोनी हो जाती तो उस घटना की जिम्मेदारी किसकी होती। हमारी राष्ट्रपति आदिवासी सुमुदाय से आती हैं।