धीरज जॉनसन,दमोह
दमोह जिले की सीमा पर विकास की रफ़्तार थमी सी प्रतीत होती है जहां ग्रामीण टूटी पुलिया और कीचड़ भरे रास्ते से गुजरते हैं।
बाटियागढ़ तहसील की ग्राम पंचायत छोटी पथरिया के गांव सोरई के हरदू टोला में बारिश के मौसम में खतरा बढ़ जाता है।लगता है इस गांव के विकास की फाइल शायद कहीं दबी पड़ी है। यहां के हरदू टोला के 200 से अधिक ग्रामीण वर्षों से टूटी पुलिया और कीचड़ से भरे कच्चे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। यह रास्ता बरसात में ऐसे रूप धारण कर लेता है कि सफर किसी एडवेंचर रेस से कम नहीं लगता,बस फर्क इतना कि इसमें ट्रॉफी नहीं, बल्कि चोट, बुखार और परेशानी मिलते हैं।
बारिश आते ही टूटी पुलिया पर खतरे का खेल शुरू हो जाता है। मंगलवार को गांव के दो लोग इसमें गिर गए,गनीमत रही कि जंग खाई लोहे की जाली ने उन्हें नीचे गिरने से बचा लिया।

ग्रामीण बताते हैं कि वे जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराते आ रहे हैं। सड़क और पुलिया दुरुस्ती का वादा होता है, लेकिन वादे का बजट पहुंच नहीं पाता है, नतीजा कीचड़ में धंसा वादा और खतरे में फंसी जिंदगी।
रास्ते में पानी और कीचड़ के कारण ग्रामीणों को संक्रमण और सर्पदंश जैसे खतरों का सामना करना पड़ता है।लगता है जिम्मेदारों को हादसे का इंतजार है तब उनकी नज़र शायद वहां पहुंचे,ग्रामीणों ने बताया कि सुविधाएं तो छोड़िए सुरक्षा का इंतजाम होना चाहिए।