रिपोर्ट सुनील सोन्हिया भोपाल
रूपाली थिएटर एवं वेलफेयर सोसायटी भोपाल द्वारा दो दिवसीय “रंग नाट्य महोत्सव” स्थानीय महादेवी वर्मा हॉल हिन्दी भवन,में आयोजित किया जा रहा है नाट्य महोत्सव के पहले दिन रूपाली सराठे निर्देशित नाटक मै नर्क से बोल रहा हूं तथा सीमा मोरे द्वारा निर्देशित नाटक बेटी हमारा अभिमान का मंचन किया गया नाटक मै नर्क से बोल रहा हूं में एकल अभिनय रूपाली सराठे ने किया।

नाटक मैं नर्क से बोल रहा हूँ, हरिशंकर परसाई जी की एक व्यंगपरक कहानी है। कहानीकार ने अपने व्यंगात्मक कथनों से इंसानों को इंसानियत की राह बताने का प्रयास किया। जीवन बिताने से अच्छा है अपनी बुद्धि विवेक व शरीर का प्रयास कर जीवन में संघर्ष कर कामयाबी हासिल करना न कि पड़े पड़े मर जाना।

“मैं नर्क से बोल रहा हूँ कहानी का नाट्य रूपातरण नर्क व्यंगात्मक और विचारोत्तेजक नाटक मानवीय स्वभाव का है, जो हरिशंकर परसाई के व्यंगपूर्ण लेखन को मंच पर जीवित करता है यह नाटक समाज के विभिन्न पहलुओं पर कटाक्ष करता और भाव व स्वभाव की कमियों को उजागर करता हैअंतरंग कल्वरल एवं वेलफेयर सोसायटी, की प्रस्तुति विभूति द्वारा लिखित नाटक- “बेटी हमारा अभिमान को निर्देशित किया सीमा मोरे ने

कथासार –
“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है. इसका उद्देश्य बेटियों को सुरक्षा और शिक्षा प्रदान करना है. साथ ही समाज में लिंग भेदभाव और सांस्कृतिक पूर्वाग्रह को समाप्त करना है। इस नाटक का महत्व आज के समय में बढ़ रही भ्रूण हत्या को रोकना है, जब बेटियों को बराबरी का अधिकार मिल रहा है. तो फिर क्यों माता-पिता बेटी होने पर गर्व महसूस क्यों नहीं करते है। बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा देना हम क्यों जरूरी नहीं समझते और बेटी को सम्मान देकर हम समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते है। नाटक का उद्देश्य बेटियों को मान-सम्मान देना है, एवं सामाजिक स्वतंत्रता प्रदान करना है