मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सड़क किनारे लगे वृक्ष नहीं कटेंगे। विकास के लिए अगर पौधों को काटना जरूरी होगा तो इसके लिए अदालत से अनुमति ली जाएगी। कोर्ट द्वारा सड़क किनारे लगे वृक्ष काटने पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद भी भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर रोड किनारे लगे हरे भरे पेड़ों को लगातार व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार काट रहा है। जबकि हाल में कोर्ट से आदेश लिए बिना पेड़ काटना मुश्किल है। चूंकि पर्यावरण की जो स्थिति है, उसके अनुसार अभी अधिक से अधिक पेड़ लगाने की जरूरत है। ऐसे में पेड़ काटना कहीं से भी उचित नहीं है। वन विभाग की ओर से समय-समय पर पौधा रोपन किया जाता है। बारिश में कई तटों व सड़कों के किनारे पौधा रोपन किया गया था। जैसे वन महोत्सव, वृक्ष सुरक्षा, हर परिसर-हरा परिसर, जैसी योजनाओं के तहत वृक्षारोपण किए गए थे।इसकी शिकायत ग्रामीणो ने की हे।

वहीं दूसरी तरफ रोड पर लगे हरे भरे पेड़ काटे जा रहे हैं जिससे हरियाली काम हो रही है दूसरी ओर पेड़ों के काटने पर कोई भी अधिकारी किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं करता कार्रवाई नहीं होने से लगातार हाईवे किनारे पेड़ों की संख्या देना दिन कम होती जा रही है।
जबकि भारत में पेड़ काटने के लिए कानून हैं। अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति पेड़ काटता है, तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई हो सकती है। भारतीय वन अधिनियम, 1927, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980, और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत पेड़ों की कटाई को रोका जा सकता है।
अगर कोई व्यक्ति पेड़ काटने के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करता है, तो उसे 6 महीने की जेल हो सकती है. इसके अलावा, 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
पेड़ काटने से पर्यावरण को नुकसान होता है. पेड़ों को काटने से जल चक्र प्रभावित होता है, कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि होती है, और ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है।
पेड़ों को काटने से पशु-पक्षियों का आवास नष्ट हो जाता है, बाढ़ और आग लगती है, और लकड़ी की आपूर्ति सीमित हो जाती। इतना कुछ होने के बावजूद भी हाईवे किनारे लगे पेड़ों को धड़ल्ले से काटे जा रहे है।