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मान्य परम्पराओ और नियम के अनुसार रात होगा होलिका दहन

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मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
रंगों के त्यौहार होली के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है सदियों से चली आ रही इस परंपरा को पूरे नियमों का पालन और शुभ मुहूर्त के अनुसार पूरा किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार होलिका दहन की रात को भद्रा काल लगने के कारण होलिका दहन के समय को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सोमवार को होली है और उसके एक दिन पहले रविवार देर रात होलिका दहन होगा। इस बार होलिका दहन के समय को लेकर कुछ दुविधा की स्थिति बनी हुई है क्योंकि होली कि रात भद्रा काल है, और इस काल में होलिका दहन नहीं किया जाता इसी वजह से होलिका दहन के शुभ मुहूर्त पर संशय बना हुआ है। ज्योतिष के अनुसार भद्रा काल में किसी भी प्रकार के शुभ कार्यों को करना वर्जित माना गया है ज्योतिष में इसे अशुभ काल भी कहा जाता है। शस्त्रों के अनुसार यह भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन है। भद्रा का स्वभाव भी शनिदेव की ही तरह कठोर और क्रोधी है। इसलिए भद्रा के स्वभाव को काबू में करने के लिए ब्रह्माजी ने उन्हें काल गणना या पंचांग के प्रमुख अंग विष्टि करण में जगह दी है। इसलिए जब भी भद्र काल लगता है तो उस समय धार्मिक और मंगल कार्य नहीं किए जाते हैं।
होलिका दहन रविवार देर रात को किया गया इसके लिए शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 15 मिनट से लेकर 12 बजकर 30 मिनट तक ही रहा हालांकि इस दिन भद्रा काल भी लग था जिसकी वजह से होलिका दहन के समय में कुछ परिवर्तन हुआ था मुहूर्त भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिए उत्तम मानी जाती है। अगर भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो लेकिन भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के पश्चात जब भद्रा समाप्त हो तब होलिका दहन हो सकता है। लेकिन भद्रा मध्य रात्रि तक व्याप्त हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूंछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। लेकिन कभी भी भद्रा मुख में होलिका दहन नहीं करना चाहिए। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार भद्रा मुख में किया होली दहन अनिष्ट का स्वागत करने के जैसा माना जाता है। इसी के साथ भद्रा धरती, पाताल और स्वर्ग तीनों ही लोकों में भ्रमण करती रहती है। इसलिए होलिका दहन रविवार देर रात को किया गया इसके लिए शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 15 मिनट से लेकर 12 बजकर 30 मिनट तक ही रहा इसलिए इस बार रविवार मध्यरात्रि के बाद होलिका दहन का केवल सवा घंटा ही था। इसलिए क्षेत्र में सवा घंटे में ही होलिका दहन हुआ। दीवानगंज में पांच जगह पर होलिका दहन हुआ है। जिसमें सबसे पुराना होली कोरी मोहल्ला में जलती है। इसके बाद भवानी चौक दीवानगंज, गोसाई मोहल्ला दीवानगंज, नायक मोहल्ला दीवानगंज, पुराना गुरुद्वारा दीवानगंज में होलिका दहन हुआ है। आज पूरे गांव में जुलूस निकाला जाएगा। लोकसभा चुनाव और आचार संहिता लगने के कारण पुलिस की पहनी नजर पूरे क्षेत्र में रहेगी ताकि होली पर किसी भी प्रकार अनहोनी न हो।
अगर हो तो तुरंत उसे निपटा जाए।

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