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प.बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के स्वास्थ्य में सुधार, ममता बनर्जी मिलने पहुंचीं

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पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के स्वास्थ्य में सोमवार को सुधार आया तथा डॉक्टरों ने उन्हें ‘यांत्रिक वेंटिलेशन’ से हटाकर ‘नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन’ पर रखा। उनका इलाज कर रहे चिकित्सकों ने बताया कि भट्टाचार्य (79) के सीने का सुबह सीटी स्कैन किया गया जिससे पता चलता है कि उनके स्वास्थ्य में सुधार आया है। एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, ‘‘भट्टाचार्य के स्वास्थ्य में सुधार आया है। वह होश में हैं और इलाज का उनपर असर हो रहा है। उनकी तबीयत में सुधार हो रहा है।

उनकी जांच रिपोर्ट भी संतोषजनक हैं…।” मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज भट्टाचार्य से मिलने अस्पताल पहुंचीं। उनसे मिलने के बाद बनर्जी ने कहा कि भट्टाचार्य ने उन्हें देखकर हाथ हिलाया। अस्पताल से निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने उन्हें स्थिर पाया क्योंकि मुझे देखने के बाद उन्होंने हाथ हिलाया। डॉक्टर यथासंभव प्रयास कर रहे हैं। मैं अस्पताल को उनके प्रयासों को लेकर धन्यवाद देना चाहूंगी।”

डॉक्टर ने कहा, ‘‘ उनके रक्तचाप एवं ऑक्सीजन संतृप्तता संतोषजनक हैं लेकिन वह अब भी खतरे के बाहर नहीं हैं। उनके फेफड़े बुरी तरह प्रभावित हैं, वह 2021 में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे। पिछले 24 घंटे में उनकी हालत काफी सुधार हुआ है।” भट्टाचार्य को सांस लेने में दिक्कत के कारण अलीपुर के वुडलैंड्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था और उनमें श्वसन नली के निचले भाग में संक्रमण और ‘टाइप-2′ श्वसन संबंधी परेशानी की पुष्टि हुई थी।

वह काफी समय से सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) और उम्र संबंधी स्वास्थ्य जटिलताओं से जूझ रहे हैं। भट्टाचार्य ने पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु के स्थान पर 2000 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला था। वह 2011 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे। उसी दौरान उद्योगों के लिये भू अधिग्रहण को लेकर ममता बनर्जी की अगुवाई में आंदोलन हुआ था। पिछले कुछ सालों से भट्टाचार्य बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण आम लोगों से दूर रहे और अपने पाल एवेन्यू अपार्टमेंट में रहते थे।

उन्हें सार्वजनिक रूप से आखिरी बार तब देखा गया था जब वह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में वाम दल की रैली में अचानक पहुंच गए थे और तब भी ऑक्जीसन प्रणाली की मदद ले रहे थे। उन्होंने 2015 में माकपा की पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी से इस्तीफा दे दिया था और फिर 2018 में पार्टी के राज्य सचिवालय की सदस्यता भी छोड़ दी थी।

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