चले श्याम सुंदर से मिलने सुदामा,,,, मन में गाते चले हरे राम-रामा,,,
सी एल गौर रायसेन
मुखर्जी नगर में चल रही साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा का समापन सोमवार को सुदामा चरित्र की शानदार प्रस्तुति और मनभावन प्रसंग के साथ किया गया। कथा के अंतिम दिवस भागवत कथा वाचक स्वामी रामललाचार्य महाराज जी ने भगवान श्री कृष्ण और उन के अनन्य भक्त सुदामा चरित्र के प्रसंग की जब श्रद्धालुओं के सामने बैठा सुनाई तो कथा गुलशन मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे इस प्रसंग के तहत महाराज श्री ने कहा कि जिस प्रकार से भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनके भक्त सुदामा का जो भाव था और भगवान के प्रति जो भक्ति थी उसी प्रकार से अगर हम भगवान को उसी भाव में माने और उनकी जीवन चरित्र लीला के बारे में अनुसरण करते हुए चलें तो जीवन में आने वाली सारी कठिनाइयां अपने आप दूर हो जाती हैं, भगवान भाव के भूखे होते हैं परंतु भक्ति करने वालों और सत्य के मार्ग पर चलने वालों की परीक्षाएं बहुत होती हैं तब जाकर हमें भगवान की कृपा और दर्शन प्राप्त होते हैं। जिस तरह से सुदामा का भाव भगवान श्री कृष्ण के प्रति था आखिर भगवान श्री कृष्ण अपने गरीब सुदामा मित्र को भक्ति और समर्पण के कारण उनको बुलाना पड़ा और उनसे मिल जीवन धन्य कर दिया। भगवान से मिलने के लिए सुदामा को कितने संकट और परेशानी का सामना करना पड़ा परंतु वह भगवान के प्रति भाव से विचलित नहीं हुए और अपने मन में भगवान नाम का स्मरण करते हुए उनके पास तक पहुंच गए।

चले श्याम सुंदर से मिलने सुदामा,,,, मन में गाते चले हरे राम रामा अर्थात सुदामा अपने मन में भगवान श्री कृष्ण जो कि उनके बालसखा थे उनको हमेशा याद करते हुए अपना काम करते हैं, जब वह श्री कृष्ण से मिलने जाते हैं, जब द्वारपालों ने सुदामा का रास्ता रोका यह भगवान श्रीकृष्ण भली-भांति समझ रहे थे और देख रहे थे क्योंकि द्वारपाल सोच रहे थे कि यह गरीब व्यक्ति कहां से भगवान कृष्ण का मित्र हो सकता है परंतु भगवान श्री कृष्ण भाव के भूखे होते हैं जिस प्रकार से सुदामा की उनके प्रति लगन थी उसी का परिणाम है कि भगवान को अपनी सिंहासन से उठकर अपने वचपन के मित्र सुदामा की आवभगत करने के लिए आना पड़ा इतना ही नहीं भगवान भी भक्त सुदामा की भक्ति दीन और दशा को देखकर रो पड़ते हैं, इस समय की लीला का वर्णन नहीं किया जा सकता।

इस मार्मिक प्रसंग को सुन भागवत कथा में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु भावुक नजर आए कथा के समापन अवसर पर फूलों की होली खेलने और भगवान की सुंदर झांकी के दर्शनों और भगवान नामस्मरण संकीर्तन के पश्चात महा आरती भागवत जी की आरती की गई इसके पश्चात भागवत कथा का विधिवत समापन किया गया इस अवसर पर कथा आयोजक समाजसेवी डॉ ऐसी अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, अग्रवाल परिवार द्वारा कथा वाचक स्वामी रामललाचार्य महाराज जी को अभिनंदन पत्र भेट किया एवम् आशीर्वाद लिया । भागवत कथा के सहयोगी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, इसके पश्चात प्रसादी का वितरण किया गया एवं सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान की प्रसादी ग्रहण की।