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शिवपुरी जिले में हड़कम्प: भूदान यज्ञ लैण्ड स्कैम में ईओडब्लू दल की दस्तक

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File Photo

-एडीएम को दिया पत्र, तलब किया अब तक की भूदान जांच का रिकार्ड

-जांच में विक्रय की अनुमति के पेंच में फंसेंगे कई आईएएस भी

– गरीबों की पट्टे की जमीनों पर तने हैं धन्ना सेठों और नेताओं के गोदाम और फार्म हाउस

संजय बेचैन ,शिवपुरी

शिवपुरी जिले में हुए करीब 300 करोड़ के भूदान यज्ञ भूमि घोटाले की जांच को लेकर मंगलवार को शिवपुरी में बिजिलैंस (ईओडब्लू) की जांच टीम ने एडीएम कार्यालय में दस्तक दे डाली। यहां पहुंची टीम ने स्कैम से सम्बंधित फाइलों से जानकारी जुटाना शुरु कर दिया है, जिससे यहां हड़कम्प की स्थिति निर्मित हो गई है। बताया जाता है कि इस लैण्ड स्कैम की जांच के क्रम में ईओडब्लू ने शिवपुरी के राजस्व प्रशासन को इससे पूर्व भी तमाम पत्राचार किया और जानकारी मांगी थी मगर प्रशासन के कतिपय अधिकारी इस स्कैम को दबाने में लगे रहे।
हाल ही केबिनेट मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा मुख्य सचिव स्तर पर इस केस की त्वरित जांच के लिए बनाए गए दबाव के क्रम में जहां राजस्व प्रशासन स्तर की जांच में एकाएक तेजी आई है, वहीं एडवोकेट राजीव शर्मा की 9 फरवरी 2021 में की गई शिकायत पर से एसपी ईओडब्लू श्री बिट्टू सहगल ने जांच दल को त्वरित जांच के निर्देश दिए हैं। शिवपुरी आए जांच दल में शामिल इंस्पेक्टर सौरभ त्रिपाठी,इंस्पेक्टर यशवंत गोयल, योगेन्द्र दुबे, लीगल सेल आफीसर अनिल लोधी आदि ने मंगलवार को एडीएम दफ्तर में पहुंच कर पड़ताल शुरु की। यहां जांच दल ने अब तक इस भूदान घोटाले केस में प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण, शून्य घोषित की गई रजिस्ट्रियों के विवरण से लेकर विक्रय से वर्जित भूमि के पट्टों को विक्रय की अनुमति देने सम्बंधी आदेश, नियमावलि आदि की विस्तृत जानकारी मांगी है। टीम में शामिल बिजिलैंस अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि आगामी 10 दिन बाद यह जानकारी उन्हें उपलब्ध करा दी जाएगी। तदोपरांत सभी विन्दुओं की समीक्षा की जाएगी और जांच की दिशा तय की जाएगी। उनका कहना है यह मामला पूरे जिले की विभिन्न तहसीलों से सम्बंधित है ऐसे में जांच दल अब अपने स्तर पर भी के्रताओं से भी तथ्य जुटाएगा।
यह है भूदान स्कैम-
भूदान यज्ञ की भूमि एक प्रकार से यज्ञ की भूमि है जो भूमिधारियों ने राष्ट्रीय आन्दोलन के तहत दान स्वरूप दी थी। वह भूमि 1993 में वोर्ड समापन उपरांत राज्य सरकार में निहित हो गई। बोर्ड के स्थान पर कलेक्टर स्थापित हो गए।
गरीबों को जीविकोपार्जन के लिए आचार्य बिनोवा भावे की पहल पर मिली भूदान पट्टों की हजारों बीघा भूमि पर करोड़पति अरबपति धन्ना सेठ काबिज हो गए। जबकि मध्यभारत भूदान यज्ञ परिषद द्वारा निर्बन्धों में यह साफ उल्लेखित है कि पट्टा गृहिता स्वयं खेती करेगा, भूमि के किसी भी हित का अन्तरण नहीं करेगा, ठेके पर दूसरों को भूमि नहीं उठायेगा, दो वर्ष से अधिक पड़त नहीं रहने देगा, भूदान यज्ञ विधान की धारा 28 और 29 के अधीन भू आगम की रकम मध्यभारत सरकार को तय सीमा में चुकायेगा। ऊपर वर्णित प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर वह भूमि से बेदखल माना जायेगा और भूमि पर भूदान यज्ञ परिषद का आधिपत्य हो जायेगा। इन प्रावधानों को दरकिनार कर राजस्व और बंदोवस्त के अफ सरों, पटवारियों ने यहां ऊंचा खेल खेल डाला, खसरों से धीरे.धीरे भूदान्य और विक्रय से वर्जित शब्द ही विलोपित कर दिया और विक्रय से वर्जित यह सैंकड़ों वीघा भूमि भू कारोबारियों को बेच डाली गई वह भी बिना किसी विधिक प्रावधान के। आश्चर्यजनक तथ्य तो यह है कि मामला सामने आने के बावजूद किसी भी अधिकारी ने इस ओर देखना तक मुनासिब नहीं समझा। स्थिति यह है कि एक से दूसरे के नाम बिकते.बिकते जमीन के मूल पटृटेदार दस्तावेजों से गायब हैं। भूमि की कैफि यत बदली जा चुकी है तो चंद पट्टेधारी अपनी जंग लड़ रहे हैं।
बानगी के तौर पर शिवपुरी शहर के नजदीकी क्षेत्र आगरा.मुम्बई हाइवे पर ककरवाया गावं में ही करीब 375 बीघा भूमि पर दलित, आदिवासी, और अन्य कमजोर वर्ग के भूदान कृषकों को कृषि पट्टे दिए गए थे मगर आज यहां इन पट्टेदारों का कोई लेखा जोखा वर्तमान अभिलेखों में नहीं है। यहां धनपति और राजनेता काबिज हो चुके हैं। कुछ उदाहरण से स्थिति समझते हैं। यहां पुराने सर्वे क्रमांक 629/1 का नया सर्वे क्र 827, 629/2 का 826, 629/3 का 825, 629/4 का 824, 629/5 का 823, 629/6 का 883, 629/7 का 882, 629/8 का 881, 629/9 का 880, 629/10 का 879, 629/11 का 878, 629/12 का 877, 630/1 का 815 630/2 का 816/ 630/3 का 817, 630/4 का 818, 630/5 का नया सर्वे नं 819, 630/8 का 820, 630/7 का 821, 630/8 का 822, 630/9 का 885, 630/10 का 884, 630/12 का 890, 631 का 811/924 628/12 का नया सर्वे नं 876 628/11 का 875, 628/1 का 890, 628/2 का 891 628/3 का 892, 628/4 का 893 628/5 का 894, 628/6 का 895 628/7 का 896, 628/8 का 897 628/9 का 898, 628/10 का 899, 634 आदि सहित कई नम्बरों पर बड़े पैमाने पर पट्टे दिये गये थे जो कि भूदान बोर्ड समापन उपरांत विक्रित हो चुके हैं। जबकि यह भूमि विक्रय से वर्जित भूमि थी।
पूर्व में भूदान खाते की ककरवाया के पटवारी हल्का नं 57 की भूमि के 18-18 बीघा के पट्टे, भुज्जी, विशुनलाल, रतन, किशनलाल, नेवाजी काछी, ठाकुरलाल, दबरिया, बाबू काछी, कन्हैयालाल, रामलाल, पूरन, सोडू, भदई, चोखरिया, मंगलिया, ग्यासी कोली, लोहरे, परसादी, हरकिशन, परमा, अमरलाल, खच्चू, प्रभू आदि को प्रदान किये गये और ये तमाम पट्टे 3 अगस्त 1987 को सचिव भूदान बोर्ड भोपाल के आदेश से निरस्त भी कर दिये गये। जिसके बाद यह भूमि शासकीय हो गई मगर विक्रय से वर्जित बनी रही। इसके साथ ही शुरु हुआ गोलमाल का खेल। राजस्व के रिकार्ड की हेराफेरी कर यह जमीन शहर के नामचीन लोगों के निजी स्वामित्व की भूमि में तब्दील हो चुकी है। जिले भर में ऐसे सैंकड़ों उदाहरण हैं जिनमें बिना सक्षम अथार्टी की अनुमति के पटटा धारक को पहले भू स्वामी बनाया और फिर उसकी भूमि के विक्रय की अनुमति दे डाली जबकि इससे पूर्व पटटा धारक को भूस्वामी बनाने के लिए प्रथक से परमीशन जरुरी थी जिसकी अनदेखी की गई।

2007 से कलेक्टर कोर्ट में जांच के नाम पर बंधे पड़े हैं बस्ते-
दैनिक जागरण की खबर पर सबसे पहले 2007 में जिले भर में भूदान की जमीनों के गोलमाल की जांच के आदेश तत्कालीन कमिश्नर डॉ कोमल सिंह ने दिए थे, जिस पर से तत्कालीन कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव ने जिले में वर्ष 2007 में जांच दल का गठन किया जिसमें सम्बंधित एसडीएम, जिला पंजीयक और अधीक्षक भू अभिलेख को शामिल किया गया। जांच हुई और जिले भर में 486 से अधिक मामले भूदान अफ रातफ री के सामने आए जिन्हें कलेक्टर न्यायालय ने जांच में लिया। आज 2022 तक यह जांच पूरी नहीं होना इस बात का परिचायक है कि प्रशासन के अधिकारी इसको लेकर कतई गम्भीर नहीं हैं। यहां भूदान और राजस्व की सरकारी भूमि को जिस पैमाने पर खुर्द बुर्द किया गया वह गम्भीर इश्यु है।

-पक्ष विपक्ष और धन्ना सेठों का सिण्डीकेट है शामिल 
इस खेल में कांग्रेस और भाजपा के कई प्रभावशाली नेता गले गले तक डूबे हैं और कई बड़े पूजी पतियों के नाम भी यह जमीन पहुंच गई है कई राजस्व के अधिकारी कर्मचारी इस गोलमाल में शामिल हैं। नौकरशाहों ने भी इस लूटा मारी में जमकर भ्रष्टाचार किया है। नतीजतन 2007 से शुरू की गई जांच 2022 में भी अधूरी पड़ी हुई है फ ाइलें कलेक्टर कार्यालय में धूल खा रही हैं।

इनका कहना है-
भूदान यज्ञ वोर्ड खत्म होने के बाद पट्टों की यह भूमि शासन के स्वामित्व में आनी चाहिए थी जबकि यह चंद करोड़पतियों की बपौती बन गई।
आज लड़ाई इस बात की है कि निजी खातों में नियम विरुद्ध दर्ज जमीनों को फि र से शासकीय खाते में दर्ज कराने की पहल की जाए। विधि विरुद्ध किया गया कोई भी कार्य जब प्रकाश में आता है तो उसे कार्यवाही की जद में लिया जाना और तय प्रावधानों के अनुरुप फि र से उसे शासन हित और लोक हित में दुरुस्त किया जाना आवश्यक है। राजस्व के पटवारियों से लेकर यहां डिप्टी कलेक्टर और कुछ कलेक्टर्स ने आपराधिक साजिश के साथ इस जमीन को खुर्दबुर्द करने और कराने में भू माफियाओं के सहयोगी की भूमिका निभाई है इसकी गहन जांच हो तो कई पूर्व आईएएस भी इसमें फंसते दिखाई देेेंगे। शिवपुरी जिले में ही करीब तीन सौ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि मुक्त कराई जा सकती है।
एडवोकेट राजीव शर्मा
शिकायत कर्ता भूदान स्कैम

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